Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Aug 2016 · 1 min read

“दर्द”

जज़्बातों की नर्म चादर लपेटे,
लफ्जो के तकिये पे लेटे,
करवटें बदलते रहे ताउम्र,
हौसलों को आगोश में समेटे,
रूह पर पहरे लगे हैं,
ज़ुबां भी खामोश है ,
धधकते शोले नज़र के,
आंख के आब से बुझे हैं ,
अरमां टूटने लगे हैं ,
घाव रिसने लगे हैं ,
दर्द उन्माद बनकर ,
खामोशियाँ तोड़ने लगे हैं|
……निधि…

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Comment · 398 Views
You may also like:
तेरे वजूद को।
Taj Mohammad
*एक कवि-गोष्ठी यह भी (हास्य कुंडलिया)*
Ravi Prakash
कह न पाई मै,बस सोचती रही
Ram Krishan Rastogi
चुप ही रहेंगे...?
मनोज कर्ण
✍️✍️अतीत✍️✍️
'अशांत' शेखर
मेरे आँगन में इक लड़की
rkchaudhary2012
लांगुरिया
Subhash Singhai
हमें तुम भुल गए
Anamika Singh
ज़िन्दगी
लक्ष्मी सिंह
भारतीय महीलाओं का महापर्व हरितालिका तीज है।
आचार्य श्रीराम पाण्डेय
धैर्य कि दृष्टि धनपत राय की दृष्टि
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
मूकदर्शक
Shyam Sundar Subramanian
'प्रेम' ( देव घनाक्षरी)
Godambari Negi
कैसे प्रेम इज़हार करूं
Er.Navaneet R Shandily
” INDOLENCE VS STRENUOUS”
DrLakshman Jha Parimal
व्यंग्य- प्रदूषण वाली दीवाली
जयति जैन 'नूतन'
बे'एतबार से मौसम की
Dr fauzia Naseem shad
दूरियाँ
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बर्बादी का तमाशा
Seema 'Tu hai na'
डर लगता है
Shekhar Chandra Mitra
माँ कात्यायनी
Vandana Namdev
बन जायेगा जल्द ही
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
स्वास्थ्य
Saraswati Bajpai
दफन
Dalveer Singh
'माॅं बहुत बीमार है'
Rashmi Sanjay
ठंडे पड़ चुके ये रिश्ते।
Manisha Manjari
छठ महापर्व
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
प्यार का अलख
DESH RAJ
रोग ने कितना अकेला कर दिया
Dr Archana Gupta
Loading...