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23 Nov 2022 · 1 min read

तेरी दहलीज़ तक

तेरी दहलीज तक ,प्यास ले आई हमें।
हर अब्र की फूटी किस्मत दिखलाई हमें।

नहीं बरसना था तो काली घटा क्यों छाई
ये ऐसी झूठी तसल्ली क्यो दिलाई हमें।

शिद्दत ए तिशनगी , कोई न मेरी समझा
सब्र करने की ही बात समझाई हमें।

वस्ल ए इंतजार में थक गई जब आंखें
मुद्दों तक फिर कभी नींद न आई हमें।

ऐ मोहसिन तुमसे गिला करें भी तो क्या
अपनी नाकामियां ही यहां तक ले आई हमें ।

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
238 Views
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