Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Nov 2023 · 1 min read

तेरा बना दिया है मुझे

तेरा बना दिया है मुझे, तेरी इन अदाओं ने।
कर लिया है कैद मुझे, तेरी इन निगाहों ने।।
तेरा बना दिया है मुझे ——————-।।

आजा अब तू करीब भी, अच्छा है मेरा नसीब भी।
जो मांगा वह मिल गया, देखा जब तेरी निगाहों ने।।
तेरा बना दिया है मुझे ——————–।।

छूने दो इन हाथों को मुझे, अपनी साँसों में बसने दो।
मुझसे अब क्या शर्माना, फूल बिछाये है राहों ने।।
तेरा बना दिया है मुझे ———————-।।

गुलाब जैसे है तुम्हारे लब, साया है तेरी ये जुल्फें।
बाँहों का हार गले में डाल, रात सजाई है तारों ने।।
तेरा बना दिया है मुझे ———————-।।

जोड़ ले रिश्ता हम ऐसा, जो जन्मों तक टूटे नहीं।
आवो लगाये हम एक चमन, गाया है गीत बहारों ने।।
तेरा बना दिया है मुझे ———————।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

168 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
अब न तुमसे बात होगी...
अब न तुमसे बात होगी...
डॉ.सीमा अग्रवाल
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
हरवंश हृदय
यह कैसा है धर्म युद्ध है केशव
यह कैसा है धर्म युद्ध है केशव
VINOD CHAUHAN
3429⚘ *पूर्णिका* ⚘
3429⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
मुँहतोड़ जवाब मिलेगा
मुँहतोड़ जवाब मिलेगा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
बदनाम गली थी
बदनाम गली थी
Anil chobisa
(23) कुछ नीति वचन
(23) कुछ नीति वचन
Kishore Nigam
हम छि मिथिला के बासी
हम छि मिथिला के बासी
Ram Babu Mandal
बेअदब कलम
बेअदब कलम
AJAY PRASAD
पिता पर एक गजल लिखने का प्रयास
पिता पर एक गजल लिखने का प्रयास
Ram Krishan Rastogi
जीवन संघर्ष
जीवन संघर्ष
Omee Bhargava
वैशाख की धूप
वैशाख की धूप
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
*रिश्ते*
*रिश्ते*
Dushyant Kumar
सद्विचार
सद्विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
दिगपाल छंद{मृदुगति छंद ),एवं दिग्वधू छंद
दिगपाल छंद{मृदुगति छंद ),एवं दिग्वधू छंद
Subhash Singhai
हमारे बाद भी चलती रहेगी बहारें
हमारे बाद भी चलती रहेगी बहारें
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
"होली है आई रे"
Rahul Singh
#ग़ज़ल-
#ग़ज़ल-
*प्रणय प्रभात*
गलत चुनाव से
गलत चुनाव से
Dr Manju Saini
मुझ को इतना बता दे,
मुझ को इतना बता दे,
Shutisha Rajput
कर रहे हैं वंदना
कर रहे हैं वंदना
surenderpal vaidya
भरे हृदय में पीर
भरे हृदय में पीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
जड़ें
जड़ें
Dr. Kishan tandon kranti
मुक्तक- जर-जमीं धन किसी को तुम्हारा मिले।
मुक्तक- जर-जमीं धन किसी को तुम्हारा मिले।
सत्य कुमार प्रेमी
नारी जागरूकता
नारी जागरूकता
Kanchan Khanna
पूजा
पूजा
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रदीप माहिर
शीर्षक – मां
शीर्षक – मां
Sonam Puneet Dubey
पहले साहब परेशान थे कि हिन्दू खतरे मे है
पहले साहब परेशान थे कि हिन्दू खतरे मे है
शेखर सिंह
*खत आखरी उसका जलाना पड़ा मुझे*
*खत आखरी उसका जलाना पड़ा मुझे*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
Loading...