Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Feb 2024 · 1 min read

डुगडुगी बजती रही ….

डुगडुगी बजती रही ……..

चिलचिलाती धूप
तालियों का शोर
करतब दिखाती बच्ची
गिर पड़ी
रस्सी से
सिक्के उछले
बेहोशी को तमाशबीन
करतब समझे
दो रोटी के संघर्ष में
बच्ची तड़पती रही
लोग तालियाँ बजाते रहे
बच्ची
साँसों से संघर्ष करती रही
जिन्दगी के मचान पर
डुगडुगी बजती रही

सुशील सरना /6-2-24

65 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
नया साल
नया साल
umesh mehra
काश जन चेतना भरे कुलांचें
काश जन चेतना भरे कुलांचें
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
नंद के घर आयो लाल
नंद के घर आयो लाल
Kavita Chouhan
सब ठीक है
सब ठीक है
पूर्वार्थ
#दुःखद_दिन-
#दुःखद_दिन-
*Author प्रणय प्रभात*
रेस का घोड़ा
रेस का घोड़ा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
आओ प्रिय बैठो पास...
आओ प्रिय बैठो पास...
डॉ.सीमा अग्रवाल
*आ गये हम दर तुम्हारे दिल चुराने के लिए*
*आ गये हम दर तुम्हारे दिल चुराने के लिए*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
*दही खाने के 15 अद्भुत चमत्कारी अमृतमयी फायदे...*
*दही खाने के 15 अद्भुत चमत्कारी अमृतमयी फायदे...*
Rituraj shivem verma
मानवता
मानवता
विजय कुमार अग्रवाल
ये जो समुद्र है कि बड़े अकड़ में रहता है
ये जो समुद्र है कि बड़े अकड़ में रहता है
कवि दीपक बवेजा
आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने - संदीप ठाकुर
आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
वो मुझे रूठने नही देती।
वो मुझे रूठने नही देती।
Rajendra Kushwaha
जब मैं मर जाऊं तो कफ़न के जगह किताबों में लपेट देना
जब मैं मर जाऊं तो कफ़न के जगह किताबों में लपेट देना
Keshav kishor Kumar
अपने जीवन के प्रति आप जैसी धारणा रखते हैं,बदले में आपका जीवन
अपने जीवन के प्रति आप जैसी धारणा रखते हैं,बदले में आपका जीवन
Paras Nath Jha
*मनुष्य जब मरता है तब उसका कमाया हुआ धन घर में ही रह जाता है
*मनुष्य जब मरता है तब उसका कमाया हुआ धन घर में ही रह जाता है
Shashi kala vyas
ये पैसा भी गजब है,
ये पैसा भी गजब है,
Umender kumar
.
.
Ragini Kumari
वर्ण पिरामिड
वर्ण पिरामिड
Neelam Sharma
मंजिल एक है
मंजिल एक है
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
*आई ए एस फॅंस गए, मंत्री दसवीं फेल (हास्य कुंडलिया)*
*आई ए एस फॅंस गए, मंत्री दसवीं फेल (हास्य कुंडलिया)*
Ravi Prakash
छोड़ चली तू छोड़ चली
छोड़ चली तू छोड़ चली
gurudeenverma198
और क्या ज़िंदगी का हासिल है
और क्या ज़िंदगी का हासिल है
Shweta Soni
3172.*पूर्णिका*
3172.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
यकीन
यकीन
Sidhartha Mishra
पहचान धूर्त की
पहचान धूर्त की
विक्रम कुमार
वक़्त का सबक़
वक़्त का सबक़
Shekhar Chandra Mitra
कृषक
कृषक
Shaily
कलमबाज
कलमबाज
Mangilal 713
" जुबां "
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...