Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 May 2022 · 1 min read

ठोकर तमाम खा के….

ठोकर तमाम खा के सँभलते रहे हैं हम।
हसरत लिये मुकाम की चलते रहे हैं हम।।

आगे न ग़र्दिशों के झुका अपना सर कभी,
आँखें मिला के उनसे निकलते रहे हैं हम।।

उनको रहा गुमान मसीहाई का मगर,
मक़तूल हो के रोज़ उछलते रहे हैं हम।।

अहसास दर्द का न कभी इसलिए हुआ,
काँटों के रास्तों पे टहलते रहे हैं हम।।

अब और क्या सबूत दें आँखों की प्यास का,
पाने को दीद उनकी मचलते रहे हैं हम।।

दो-चार हाथ ग़म से भी करना पड़े तो क्या,
हालात ज़िन्दगी के बदलते रहे हैं हम।।

आबाद रौशनी से रहे “अश्क” उनका दिल,
बस इसलिए चराग़ सा जलते रहे हैं हम।।

©अशोक कुमार “अश्क चिरैयाकोटी”

4 Likes · 4 Comments · 452 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वहशीपन का शिकार होती मानवता
वहशीपन का शिकार होती मानवता
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दीप जलते रहें - दीपक नीलपदम्
दीप जलते रहें - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
जमातों में पढ़ों कलमा,
जमातों में पढ़ों कलमा,
Satish Srijan
भुजरियों, कजलियों की राम राम जी 🎉🙏
भुजरियों, कजलियों की राम राम जी 🎉🙏
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-143के दोहे
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-143के दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
💐अज्ञात के प्रति-33💐
💐अज्ञात के प्रति-33💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
नहीं आये कभी ऐसे तूफान
नहीं आये कभी ऐसे तूफान
gurudeenverma198
हुऐ बर्बाद हम तो आज कल आबाद तो होंगे
हुऐ बर्बाद हम तो आज कल आबाद तो होंगे
Anand Sharma
रमेशराज के 2 मुक्तक
रमेशराज के 2 मुक्तक
कवि रमेशराज
हिन्दी पर विचार
हिन्दी पर विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
पर खोल…
पर खोल…
Rekha Drolia
घर और घर की याद
घर और घर की याद
डॉ० रोहित कौशिक
शिद्तों  में  जो बे'शुमार रहा ।
शिद्तों में जो बे'शुमार रहा ।
Dr fauzia Naseem shad
*सदियों बाद पधारे हैं प्रभु, जन्मभूमि हर्षाई है (हिंदी गजल)*
*सदियों बाद पधारे हैं प्रभु, जन्मभूमि हर्षाई है (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
तेरे इंतज़ार में
तेरे इंतज़ार में
Surinder blackpen
■ आज की बात
■ आज की बात
*Author प्रणय प्रभात*
ସେହି ଫୁଲ ଠାରୁ ଅଧିକ
ସେହି ଫୁଲ ଠାରୁ ଅଧିକ
Otteri Selvakumar
देश से दौलत व शुहरत देश से हर शान है।
देश से दौलत व शुहरत देश से हर शान है।
सत्य कुमार प्रेमी
ताप
ताप
नन्दलाल सुथार "राही"
जिंदगी में ऐसा इंसान का होना बहुत ज़रूरी है,
जिंदगी में ऐसा इंसान का होना बहुत ज़रूरी है,
Mukesh Jeevanand
अपना ख़याल तुम रखना
अपना ख़याल तुम रखना
Shivkumar Bilagrami
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रीतम श्रावस्तवी
"नींद का देवता"
Dr. Kishan tandon kranti
* मुक्तक *
* मुक्तक *
surenderpal vaidya
यादों को याद करें कितना ?
यादों को याद करें कितना ?
The_dk_poetry
24/240. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/240. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
गर्मी आई
गर्मी आई
Dr. Pradeep Kumar Sharma
_देशभक्ति का पैमाना_
_देशभक्ति का पैमाना_
Dr MusafiR BaithA
हार मानूंगा नही।
हार मानूंगा नही।
Rj Anand Prajapati
मधमक्खी
मधमक्खी
Dr Archana Gupta
Loading...