Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Nov 2023 · 1 min read

झुकता हूं…….

मत पूछ मुझसे कि मैं हरदम क्यों झुकता हूं
तेरे आगे से गुजरने के बाद भी मैं रुकता हूं
ये सोच कर कि कंही तू मुझे भूल न जाये
चिंता की आग में जलता फिर से बुझता हूं
मत पूछ मुझसे कि मैं…..
उस रोज तूने पूछा कि मजबूर तू क्यो है इतना
जब कह दिया है तुमने कि तय है हमारा मिलना
दो कदम साथ चलके खुद तय कर लिया छिटकना
कुछ देर बाद फिर करीब आके कांधे पे यूँ सिसकना
मत पूछ मुझसे कि मैं …….

Language: Hindi
1 Like · 170 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
चला गया
चला गया
Mahendra Narayan
पल भर फासला है
पल भर फासला है
Ansh
सोशल मीडिया
सोशल मीडिया
Raju Gajbhiye
लखनऊ शहर
लखनऊ शहर
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
कर लो कर्म अभी
कर लो कर्म अभी
Sonam Puneet Dubey
लहू जिगर से बहा फिर
लहू जिगर से बहा फिर
Shivkumar Bilagrami
बिना पंख फैलाये पंछी को दाना नहीं मिलता
बिना पंख फैलाये पंछी को दाना नहीं मिलता
Anil Mishra Prahari
3221.*पूर्णिका*
3221.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
"आत्मकथा"
Rajesh vyas
*गीता सुनाई कृष्ण ने, मधु बॉंसुरी गाते रहे(मुक्तक)*
*गीता सुनाई कृष्ण ने, मधु बॉंसुरी गाते रहे(मुक्तक)*
Ravi Prakash
For a thought, you're eternity
For a thought, you're eternity
पूर्वार्थ
ग़ज़ल
ग़ज़ल
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
प्रकृति
प्रकृति
Monika Verma
"मदहोश"
Dr. Kishan tandon kranti
मैं कौन हूँ?मेरा कौन है ?सोच तो मेरे भाई.....
मैं कौन हूँ?मेरा कौन है ?सोच तो मेरे भाई.....
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आप लोग अभी से जानवरों की सही पहचान के लिए
आप लोग अभी से जानवरों की सही पहचान के लिए
शेखर सिंह
मेरी कलम से बिखरी स्याही कभी गुनगुनाएंगे,
मेरी कलम से बिखरी स्याही कभी गुनगुनाएंगे,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
सफ़र में लाख़ मुश्किल हो मगर रोया नहीं करते
सफ़र में लाख़ मुश्किल हो मगर रोया नहीं करते
Johnny Ahmed 'क़ैस'
घड़ी का इंतजार है
घड़ी का इंतजार है
Surinder blackpen
*जीवन खड़ी चढ़ाई सीढ़ी है सीढ़ियों में जाने का रास्ता है लेक
*जीवन खड़ी चढ़ाई सीढ़ी है सीढ़ियों में जाने का रास्ता है लेक
Shashi kala vyas
आग लगाना सीखिए ,
आग लगाना सीखिए ,
manisha
पितृ दिवस
पितृ दिवस
Ram Krishan Rastogi
धड़कन से धड़कन मिली,
धड़कन से धड़कन मिली,
sushil sarna
व्यक्ति को ख्वाब भी वैसे ही आते है जैसे उनके ख्यालात होते है
व्यक्ति को ख्वाब भी वैसे ही आते है जैसे उनके ख्यालात होते है
Rj Anand Prajapati
प्यार करोगे तो तकलीफ मिलेगी
प्यार करोगे तो तकलीफ मिलेगी
Harminder Kaur
धूमिल होती यादों का, आज भी इक ठिकाना है।
धूमिल होती यादों का, आज भी इक ठिकाना है।
Manisha Manjari
हो जाएँ नसीब बाहें
हो जाएँ नसीब बाहें
सिद्धार्थ गोरखपुरी
....एक झलक....
....एक झलक....
Naushaba Suriya
सजदे में सर झुका तो
सजदे में सर झुका तो
shabina. Naaz
Loading...