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5 Jun 2016 · 1 min read

जोड़ना

जोड़ना ही जोड़ना हमको घटाना ही नहीं।
दुश्मन अपने तो कभी कही बनाना ही नहीं ।
घूमूँगा फिरूँगा भाषा सबकी समझूँगा मैं ।
पर उम्मीद किसी से ज्यादा लगाना ही नहीं।।

***** आलोक मित्तल ‘उदित’ *****
******* रायपुर *******

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
332 Views
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