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Sep 30, 2016 · 1 min read

जीवन सत्य

हुआ प्रस्थान बचपन का हुआ आगाज यौवन का
यहीं प्रारंभ होता है यहीं परिवार-उपवन का।
बुढ़ापे के लिए रखते कमाई मान धन सेवा
यहीं फिर खत्म होता है सभी कुछ खेल जीवन का।

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