Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Jul 2023 · 1 min read

जीवन में ईमानदारी, सहजता और सकारात्मक विचार कभीं मत छोड़िए य

जीवन में ईमानदारी, सहजता और सकारात्मक विचार कभीं मत छोड़िए यदि छोड़ना ही हैं तो नकारात्मक विचार, अभिमान और बेइमानी को छोड़िए।

©®/दामोदर विरमाल | Damodar Virmal

142 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
तुम्हीं तुम हो.......!
तुम्हीं तुम हो.......!
Awadhesh Kumar Singh
अपना पीछा करते करते
अपना पीछा करते करते
Sangeeta Beniwal
प्रयत्नशील
प्रयत्नशील
Shashi Mahajan
*पंचचामर छंद*
*पंचचामर छंद*
नवल किशोर सिंह
जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी से इतना दूर होने के बावजूद भी उसे अप
जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी से इतना दूर होने के बावजूद भी उसे अप
Sukoon
दशरथ माँझी संग हाइकु / मुसाफ़िर बैठा
दशरथ माँझी संग हाइकु / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
उम्मीद की आँखों से अगर देख रहे हो,
उम्मीद की आँखों से अगर देख रहे हो,
Shweta Soni
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
भूमि भव्य यह भारत है!
भूमि भव्य यह भारत है!
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
THE FLY (LIMERICK)
THE FLY (LIMERICK)
SURYA PRAKASH SHARMA
"" *सुनीलानंद* ""
सुनीलानंद महंत
दोहा पंचक. . . .
दोहा पंचक. . . .
sushil sarna
बहे संवेदन रुप बयार🙏
बहे संवेदन रुप बयार🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मैं जीना सकूंगा कभी उनके बिन
मैं जीना सकूंगा कभी उनके बिन
कृष्णकांत गुर्जर
हर बार धोखे से धोखे के लिये हम तैयार है
हर बार धोखे से धोखे के लिये हम तैयार है
manisha
राग द्वेश से दूर हों तन - मन रहे विशुद्ध।
राग द्वेश से दूर हों तन - मन रहे विशुद्ध।
सत्य कुमार प्रेमी
#चप्पलचोर_जूताखोर
#चप्पलचोर_जूताखोर
*प्रणय प्रभात*
"साम","दाम","दंड" व् “भेद" की व्यथा
Dr. Harvinder Singh Bakshi
इश्क दर्द से हो गई है, वफ़ा की कोशिश जारी है,
इश्क दर्द से हो गई है, वफ़ा की कोशिश जारी है,
Pramila sultan
तेरी आदत में
तेरी आदत में
Dr fauzia Naseem shad
...........,,
...........,,
शेखर सिंह
"अकेला"
Dr. Kishan tandon kranti
जो होता है सही  होता  है
जो होता है सही होता है
Anil Mishra Prahari
होश खो देते जो जवानी में
होश खो देते जो जवानी में
Dr Archana Gupta
परिसर खेल का हो या दिल का,
परिसर खेल का हो या दिल का,
पूर्वार्थ
हो गये अब हम तुम्हारे जैसे ही
हो गये अब हम तुम्हारे जैसे ही
gurudeenverma198
3293.*पूर्णिका*
3293.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
उम्र तो गुजर जाती है..... मगर साहेब
उम्र तो गुजर जाती है..... मगर साहेब
shabina. Naaz
*महॅंगी कला बेचना है तो,चलिए लंदन-धाम【हिंदी गजल/ गीतिका】*
*महॅंगी कला बेचना है तो,चलिए लंदन-धाम【हिंदी गजल/ गीतिका】*
Ravi Prakash
जय श्रीराम
जय श्रीराम
Indu Singh
Loading...