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22 Dec 2022 · 1 min read

पतंग

गीत

इक पंतग है जीवन अपना
बस धागों से सैर
जाये उड़ती जब यह यारा
सब मांगे हैं खैर

अभी अभी अंबर चूमा था
लेकर नई उड़ान
हाथों में थी चकरी प्यारे
मांझे में थी तान
रूठी किस्मत, कट-कट यारा
रेखाओं से बैर।।

सब बढ़ते के दुश्मन साथी
अपनी मंजिल, राह
हो बाजू में ताकत जो तो
देखे दुनिया थाह
है विडंबना बस इतनी सी
पंख कटे अब पैर।

नहीं थकेंगे, नहीं रुकेंगे
हम सूरज के वंशी
आंगन जिससे महके चहके
हम राह बसंती
अब हाथों में डोर गगन की
क्या कर लेगा गै़र।।

सूर्यकांत

Language: Hindi
Tag: गीत
141 Views
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