Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Jul 2016 · 1 min read

जादुई फल मांगता हूँ ……………….(ग़ज़ल )

जादुई फल मांगता हूँ ……………….(ग़ज़ल )

ऊब गया हूँ बेजुबानो की भीड़ में रहकर तन्हा
अब अकेले में जश्न के लिए दो पल मांगता हूँ !!

पत्थर सा बन गया हूँ देखकर बेदर्द जमाने को
नयनो के समुन्द्र से अंजुली भर जल माँगता हूँ !!

बर्बाद हो गया हूँ बहकर बदलाव की इस लहर में
रास नहीं आता आज, बीता हुआ कल मांगता हूँ !!

नफ़रतो के साये में खौफजदा है हर एक रूह
बदल जाए नजरिया आतंक का हल मांगता हूँ !!

हर तरफ खिले हो गुलशन में गुल मोहब्बत के
नीरस जिंदगी में अब वो हसीन पल मांगता हूँ !!

कोई दौलत ना जागीर चाहिये “धर्म” को यारो
मिटादे जहन से नफरत, वो जादुई फल मांगता हूँ !!
!
!
!
डी. के. निवातियाँ ____________@@@

260 Views
You may also like:
✍️✍️धूल✍️✍️
'अशांत' शेखर
भटकता चाँद
Alok Saxena
युद्ध सिर्फ प्रश्न खड़ा करता है [भाग२]
Anamika Singh
# जिंदगी ......
Chinta netam " मन "
✍️बचपन का ज़माना ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
Writing Challenge- माता-पिता (Parents)
Sahityapedia
बाट जोहती इक दासी
Rashmi Sanjay
परेशां हूं बहुत।
Taj Mohammad
कर्म का मर्म
Pooja Singh
पिता का प्रेम
Seema gupta ( bloger) Gupta
|| संत नरसी (नरसिंह) मेहता || 🌷
Pravesh Shinde
🍀🌺परमात्मा सर्वोपरि🌺🍀
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
आदतें
AMRESH KUMAR VERMA
कविता संग्रह
श्याम सिंह बिष्ट
"फल"
Dushyant Kumar
प़थम स्वतंत्रता संग्राम
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
कविता में मुहावरे
Ram Krishan Rastogi
सारी फिज़ाएं छुप सी गई हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
खैरियत का जवाब आया
Seema 'Tu hai na'
कहाँवा से तु अइलू तुलसी
Gouri tiwari
आँखों में बगावत है ghazal by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
तू इंसान है
Sushil chauhan
विचारधारा
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
जीवन साथी
जगदीश लववंशी
*चिड़िया बोली (बाल कविता)*
Ravi Prakash
क्या करें हम?
Shekhar Chandra Mitra
🌹खिला प्रसून।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
नख-शिख हाइकु
Ashwani Kumar Jaiswal
दूरियां किसको रास आती हैं
Dr fauzia Naseem shad
और जीना चाहता हूं मैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Loading...