Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Apr 2024 · 1 min read

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी
चाय की तरह है
सब कुछ
मिला होने पर भी
सुकून तभी
मिलता है
जब साथ हो
कोई अपना
यार

124 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
एक कमबख्त यादें हैं तेरी !
एक कमबख्त यादें हैं तेरी !
The_dk_poetry
ॐ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
"राजनीति" विज्ञान नहीं, सिर्फ़ एक कला।।
*प्रणय प्रभात*
हजारों मील चल करके मैं अपना घर पाया।
हजारों मील चल करके मैं अपना घर पाया।
Sanjay ' शून्य'
"अहम का वहम"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रेम की साधना (एक सच्ची प्रेमकथा पर आधारित)
प्रेम की साधना (एक सच्ची प्रेमकथा पर आधारित)
गुमनाम 'बाबा'
बिलकुल सच है, व्यस्तता एक भ्रम है, दोस्त,
बिलकुल सच है, व्यस्तता एक भ्रम है, दोस्त,
पूर्वार्थ
आहिस्था चल जिंदगी
आहिस्था चल जिंदगी
Rituraj shivem verma
हम करना कुछ  चाहते हैं
हम करना कुछ चाहते हैं
Sonam Puneet Dubey
ओमप्रकाश वाल्मीकि : व्यक्तित्व एवं कृतित्व
ओमप्रकाश वाल्मीकि : व्यक्तित्व एवं कृतित्व
Dr. Narendra Valmiki
मौलिक विचार
मौलिक विचार
डॉ.एल. सी. जैदिया 'जैदि'
सब दिन होते नहीं समान
सब दिन होते नहीं समान
जगदीश लववंशी
दरक जाती हैं दीवारें  यकीं ग़र हो न रिश्तों में
दरक जाती हैं दीवारें यकीं ग़र हो न रिश्तों में
Mahendra Narayan
*रोना-धोना छोड़ कर, मुस्काओ हर रोज (कुंडलिया)*
*रोना-धोना छोड़ कर, मुस्काओ हर रोज (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
आओ कभी स्वप्न में मेरे ,मां मैं दर्शन कर लूं तेरे।।
आओ कभी स्वप्न में मेरे ,मां मैं दर्शन कर लूं तेरे।।
SATPAL CHAUHAN
*बस एक बार*
*बस एक बार*
Shashi kala vyas
वो न जाने कहाँ तक मुझको आजमाएंगे
वो न जाने कहाँ तक मुझको आजमाएंगे
VINOD CHAUHAN
मतदान
मतदान
Dr Archana Gupta
Meditation
Meditation
Ravikesh Jha
दौर कागजी था पर देर तक खतों में जज्बात महफूज रहते थे, आज उम्
दौर कागजी था पर देर तक खतों में जज्बात महफूज रहते थे, आज उम्
Radhakishan R. Mundhra
गणित का एक कठिन प्रश्न ये भी
गणित का एक कठिन प्रश्न ये भी
शेखर सिंह
बिन बोले ही हो गई, मन  से  मन  की  बात ।
बिन बोले ही हो गई, मन से मन की बात ।
sushil sarna
2658.*पूर्णिका*
2658.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जय रावण जी / मुसाफ़िर बैठा
जय रावण जी / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
दिल पर किसी का जोर नहीं होता,
दिल पर किसी का जोर नहीं होता,
Slok maurya "umang"
तेरे संग मैंने
तेरे संग मैंने
लक्ष्मी सिंह
चंद मुक्तक- छंद ताटंक...
चंद मुक्तक- छंद ताटंक...
डॉ.सीमा अग्रवाल
आस
आस
Shyam Sundar Subramanian
शिक्षित बनो शिक्षा से
शिक्षित बनो शिक्षा से
gurudeenverma198
* हिन्दी को ही *
* हिन्दी को ही *
surenderpal vaidya
Loading...