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8 Jul 2016 · 1 min read

ज़िन्दगी गुज़रती होगी

कहीं बंद किवाड़ों में भी आरज़ू सिसकती होगी।
अपने अरमानों को पूरा करने को तरसती होगी।

कुछ बेड़ियां यूं बेवजह ही कायम थी मगर
रह रहकर उनमें बगावत सी मचलती होगी।

कैसे कह दोगे नहीं गुजाइंश थी कोई मुनासिब
वो कौन खुशबू है जो न कहीं महकती होगी।

था वास्ता इक अंजानी सी आस का इस कदर
पर अश्कों से पल पल ज़िन्दगी गुज़रती होगी।।।
कामनी गुप्ता ***

3 Comments · 241 Views
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