Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Feb 2024 · 1 min read

जहाँ सूर्य की किरण हो वहीं प्रकाश होता है,

जहाँ सूर्य की किरण हो वहीं प्रकाश होता है,
और जहाँ प्रेम की भाषा हो वहीं परिवार होता है।

57 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
🙅चुनावी पतझड़🙅
🙅चुनावी पतझड़🙅
*Author प्रणय प्रभात*
संकल्प
संकल्प
Dr. Pradeep Kumar Sharma
कोहिनूराँचल
कोहिनूराँचल
डिजेन्द्र कुर्रे
सास खोल देहली फाइल
सास खोल देहली फाइल
नूरफातिमा खातून नूरी
*शबरी (कुंडलिया)*
*शबरी (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
रंग पंचमी
रंग पंचमी
जगदीश लववंशी
कामुकता एक ऐसा आभास है जो सब प्रकार की शारीरिक वीभत्सना को ख
कामुकता एक ऐसा आभास है जो सब प्रकार की शारीरिक वीभत्सना को ख
Rj Anand Prajapati
ये जो तेरे बिना भी, तुझसे इश्क़ करने की आदत है।
ये जो तेरे बिना भी, तुझसे इश्क़ करने की आदत है।
Manisha Manjari
पानी जैसा बनो रे मानव
पानी जैसा बनो रे मानव
Neelam Sharma
उस दिन पर लानत भेजता  हूं,
उस दिन पर लानत भेजता हूं,
Vishal babu (vishu)
गौतम बुद्ध रूप में इंसान ।
गौतम बुद्ध रूप में इंसान ।
Buddha Prakash
तू मुझको संभालेगी क्या जिंदगी
तू मुझको संभालेगी क्या जिंदगी
कृष्णकांत गुर्जर
* मुस्कुराते नहीं *
* मुस्कुराते नहीं *
surenderpal vaidya
भुला देना.....
भुला देना.....
A🇨🇭maanush
मेरी गुड़िया (संस्मरण)
मेरी गुड़िया (संस्मरण)
Kanchan Khanna
रविवार की छुट्टी
रविवार की छुट्टी
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
तिलक-विआह के तेलउँस खाना
तिलक-विआह के तेलउँस खाना
आकाश महेशपुरी
मेरी फितरत है, तुम्हें सजाने की
मेरी फितरत है, तुम्हें सजाने की
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मुश्किल है कितना
मुश्किल है कितना
Swami Ganganiya
Dard-e-Madhushala
Dard-e-Madhushala
Tushar Jagawat
खाने पीने का ध्यान नहीं _ फिर भी कहते बीमार हुए।
खाने पीने का ध्यान नहीं _ फिर भी कहते बीमार हुए।
Rajesh vyas
*
*"मां चंद्रघंटा"*
Shashi kala vyas
प्रतीक्षा, प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा
प्रतीक्षा, प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
गुम लफ्ज़
गुम लफ्ज़
Akib Javed
मृत्यु संबंध की
मृत्यु संबंध की
DR ARUN KUMAR SHASTRI
हम अपनी ज़ात में
हम अपनी ज़ात में
Dr fauzia Naseem shad
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
धीरे धीरे
धीरे धीरे
रवि शंकर साह
"कविता क्या है?"
Dr. Kishan tandon kranti
ताप जगत के झेलकर, मुरझा हृदय-प्रसून।
ताप जगत के झेलकर, मुरझा हृदय-प्रसून।
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...