Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Aug 2023 · 1 min read

” जलाओ प्रीत दीपक “

जलाओ प्रीत दीपक,मिटे जो अंधेरा
घटे तम जो अंतस, है घेरा घनेरा

छंटे मैं का बादल,हो फिर से सबेरा
बुझे आग ईर्ष्या हो तेरा न मेरा

अमन हो चमन हो, ख़ुशी का बसेरा
अपनों से दूरी, न ग़म का हो फेरा

जलाओ प्रीत दीपक, मिटे जो अंधेरा
•••• कलमकार ••••
चुन्नू लाल गुप्ता – मऊ (उ.प्र.)

234 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वह
वह
Lalit Singh thakur
सत्य मिलता कहाँ है?
सत्य मिलता कहाँ है?
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
*जाते हैं जग से सभी, राजा-रंक समान (कुंडलिया)*
*जाते हैं जग से सभी, राजा-रंक समान (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
भोर
भोर
Kanchan Khanna
बह्र ## 2122 2122 2122 212 फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन काफिया ## आ रदीफ़ ## कुछ और है
बह्र ## 2122 2122 2122 212 फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन काफिया ## आ रदीफ़ ## कुछ और है
Neelam Sharma
निदा फाज़ली का एक शेर है
निदा फाज़ली का एक शेर है
Sonu sugandh
उतर जाती है पटरी से जब रिश्तों की रेल
उतर जाती है पटरी से जब रिश्तों की रेल
हरवंश हृदय
वसियत जली
वसियत जली
भरत कुमार सोलंकी
यारो ऐसी माॅं होती है, यारो वो ही माॅं होती है।
यारो ऐसी माॅं होती है, यारो वो ही माॅं होती है।
सत्य कुमार प्रेमी
कड़वा बोलने वालो से सहद नहीं बिकता
कड़वा बोलने वालो से सहद नहीं बिकता
Ranjeet kumar patre
दर्द अपना संवार
दर्द अपना संवार
Dr fauzia Naseem shad
"जवाब"
Dr. Kishan tandon kranti
सिसकियाँ जो स्याह कमरों को रुलाती हैं
सिसकियाँ जो स्याह कमरों को रुलाती हैं
Manisha Manjari
फितरत
फितरत
kavita verma
#आंखों_की_भाषा
#आंखों_की_भाषा
*प्रणय प्रभात*
नन्ही मिष्ठी
नन्ही मिष्ठी
Manu Vashistha
माँ की चाह
माँ की चाह
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
दोस्ती
दोस्ती
Mukesh Kumar Sonkar
दृढ़
दृढ़
Sanjay ' शून्य'
क्रोध
क्रोध
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बरसात हुई
बरसात हुई
Surya Barman
आंखों से अश्क बह चले
आंखों से अश्क बह चले
Shivkumar Bilagrami
माटी की सोंधी महक (नील पदम् के दोहे)
माटी की सोंधी महक (नील पदम् के दोहे)
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
जिस मीडिया को जनता के लिए मोमबत्ती बनना चाहिए था, आज वह सत्त
जिस मीडिया को जनता के लिए मोमबत्ती बनना चाहिए था, आज वह सत्त
शेखर सिंह
दिल का दर्द
दिल का दर्द
Dipak Kumar "Girja"
बेटियां
बेटियां
Neeraj Agarwal
ग़ज़ल (मिलोगे जब कभी मुझसे...)
ग़ज़ल (मिलोगे जब कभी मुझसे...)
डॉक्टर रागिनी
3477🌷 *पूर्णिका* 🌷
3477🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
जाने वाले बस कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
जाने वाले बस कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
VINOD CHAUHAN
अपने जीवन के प्रति आप जैसी धारणा रखते हैं,बदले में आपका जीवन
अपने जीवन के प्रति आप जैसी धारणा रखते हैं,बदले में आपका जीवन
Paras Nath Jha
Loading...