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18 Oct 2016 · 1 min read

जयबालाजी :: परिमोहन की, परिशोधनकी करें बात:: जितेंद्रकमलआनंद ( ४५)

ताटंक छंद क्रमॉक ४६–

परिमोहनकी, परिशोधन की, करें बात सब परहित की ।
पराभक्ति जब परिवर्तन की करे बात ,खोले खिड़की ।
कहती है वह नया सबेरा, देखो अब आने वाला ।
दर्शयिता वह होगा पथ का ,अंधकार जाने वाला ।।

—— जितेन्द्र कमल आनंद

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
121 Views
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