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12 Aug 2022 · 1 min read

जब काँटों में फूल उगा देखा

जीवन में एक नई चाह दिखी
जब काँटों में फूल खिला देखा
जीवन में एक नई राह मिली
जब काँटो में फूल उगा देखा

ना उगता बबूल मरूस्थल में
कहाँ होता नीड़ परिंदो का
घायल की तड़प समझ आई
जब पाँव में सूल चुभा देखा

जंगल काँटो से है भरा पड़ा
कौन शिकायत करता है
हमको जब कष्ट मिला कोई
जीवन दुश्कर क्यों देखा

ये सच्च है कि इस जीवन में
सबको फूल नहीं मिलते
काँटो से जो हैं डरते “विनोद”
उनके गुलाब कहाँ देखा

स्वरचित:——
( विनोद चौहान )

4 Likes · 2 Comments · 229 Views
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