Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Jan 2023 · 1 min read

चित्र गुप्त पूजा

पूजा कलम दवात की,यम दुतिया के साथ।
चित्रगुप्त महाराज की, जय जयकार सनाथ।

जय जयकार सनाथ, शुरू शुचि लेखा जोखा।
कर्मों की गति मान,करें मत सबसे धोखा।
कहें प्रेम कवि राय, क्लेश मत देना दूजा।
सब शिक्षा का मूल, कलम दवात की पूजा।

डा.प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम

2 Likes · 167 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
View all
You may also like:
!!महात्मा!!
!!महात्मा!!
पंकज पाण्डेय सावर्ण्य
अबला नारी
अबला नारी
Buddha Prakash
फूल मोंगरा
फूल मोंगरा
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
23/55.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/55.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*शिव शक्ति*
*शिव शक्ति*
Shashi kala vyas
18, गरीब कौन
18, गरीब कौन
Dr Shweta sood
रावण था विद्वान् अगर तो समझो उसकी  सीख रही।
रावण था विद्वान् अगर तो समझो उसकी सीख रही।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
■ अनफिट हो के भी आउट नहीं मिस्टर पनौती लाल।
■ अनफिट हो के भी आउट नहीं मिस्टर पनौती लाल।
*Author प्रणय प्रभात*
गूँज उठा सर्व ब्रह्माण्ड में वंदेमातरम का नारा।
गूँज उठा सर्व ब्रह्माण्ड में वंदेमातरम का नारा।
Neelam Sharma
*संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ: दैनिक रिपोर्ट*
*संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ: दैनिक रिपोर्ट*
Ravi Prakash
किसी की गलती देखकर तुम शोर ना करो
किसी की गलती देखकर तुम शोर ना करो
कवि दीपक बवेजा
मुस्कराता चेहरा
मुस्कराता चेहरा
shabina. Naaz
जो समाज की बनाई व्यस्था पे जितना खरा उतरता है वो उतना ही सम्
जो समाज की बनाई व्यस्था पे जितना खरा उतरता है वो उतना ही सम्
Utkarsh Dubey “Kokil”
इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा।
इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
हमारा हाल अब उस तौलिए की तरह है बिल्कुल
हमारा हाल अब उस तौलिए की तरह है बिल्कुल
Johnny Ahmed 'क़ैस'
प्रेम
प्रेम
Saraswati Bajpai
धाराओं में वक़्त की, वक़्त भी बहता जाएगा।
धाराओं में वक़्त की, वक़्त भी बहता जाएगा।
Manisha Manjari
कुछ इस तरह से खेला
कुछ इस तरह से खेला
Dheerja Sharma
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
***
*** " कभी-कभी...! " ***
VEDANTA PATEL
सौन्दर्य के मक़बूल, इश्क़! तुम क्या जानो प्रिय ?
सौन्दर्य के मक़बूल, इश्क़! तुम क्या जानो प्रिय ?
Varun Singh Gautam
लम्हा भर है जिंदगी
लम्हा भर है जिंदगी
Dr. Sunita Singh
दर्द का बस एक
दर्द का बस एक
Dr fauzia Naseem shad
आधुनिक हिन्दुस्तान
आधुनिक हिन्दुस्तान
SURYAA
शृंगार छंद
शृंगार छंद
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
I can’t be doing this again,
I can’t be doing this again,
पूर्वार्थ
तेरे पास आए माँ तेरे पास आए
तेरे पास आए माँ तेरे पास आए
Basant Bhagawan Roy
मदर्स डे
मदर्स डे
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*पानी केरा बुदबुदा*
*पानी केरा बुदबुदा*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सकठ गणेश चतुर्थी
सकठ गणेश चतुर्थी
Satish Srijan
Loading...