Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Oct 2023 · 1 min read

चार लाइनर विधा मुक्तक

कोई बोले और बोलते ही रहे
गड्ढे मुरदे उखाड़ते रहा वा रहे,
रसोई के बर्तन एकदम रिक्त हे
वह कैसे इसे विकास को सहे.
.
गर्व से जिसे हम सुनते पले बडे हुये.
वो संविदा मौलिक अधिकार दिये,
हनन हुआ, समरसता की ओर गये ,
क्या रहना उस राष्ट्र में बिन भौर भये,
.
इस धरती पर तथागत महात्मा बुद्ध आये,
पंचशील के सिद्धांत में समता महावीरजैन.
वेद आये, उपनिषद, रामायण,गीतों के गीत,
दुनिया वैसी ही रही, आये रैदास मीरा कबीर.
.
जाना चाहते हो, जिस ओर जाओ, बढ़ो,
पग पग पर बाधा है, इस पर ध्यान धरो,
पार हो गये तुम, समझ लेना विजेता हो,
मार्गप्रशस्त किये तुमने,भवसागर पार हो.
.
बिन वजह तुम अत्याचार सहो दबे रहो,
कौन तुम्हें उभारने आये,होश से काम लो,
सत्ता कुचक्र, तुमसे नहीं चलता, देख लो.
संरक्षक सत्ता, जो कोई कानून तोड़ता हो,

Language: Hindi
2 Likes · 619 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Mahender Singh
View all
You may also like:
तुमसे ज्यादा और किसको, यहाँ प्यार हम करेंगे
तुमसे ज्यादा और किसको, यहाँ प्यार हम करेंगे
gurudeenverma198
#अबोध_जिज्ञासा
#अबोध_जिज्ञासा
*Author प्रणय प्रभात*
माना के गुनाहगार बहुत हू
माना के गुनाहगार बहुत हू
shabina. Naaz
" मेरे प्यारे बच्चे "
Dr Meenu Poonia
Ye Sidhiyo ka safar kb khatam hoga
Ye Sidhiyo ka safar kb khatam hoga
Sakshi Tripathi
"पकौड़ियों की फ़रमाइश" ---(हास्य रचना)
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
हमदम का साथ💕🤝
हमदम का साथ💕🤝
डॉ० रोहित कौशिक
अपने किरदार में
अपने किरदार में
Dr fauzia Naseem shad
अश्रु की भाषा
अश्रु की भाषा
Shyam Sundar Subramanian
जनसंख्या है भार, देश हो विकसित कैसे(कुन्डलिया)
जनसंख्या है भार, देश हो विकसित कैसे(कुन्डलिया)
Ravi Prakash
পৃথিবী
পৃথিবী
Otteri Selvakumar
अनजान दीवार
अनजान दीवार
Mahender Singh
ख्वाबों से निकल कर कहां जाओगे
ख्वाबों से निकल कर कहां जाओगे
VINOD CHAUHAN
*
*"रोटी"*
Shashi kala vyas
चाहे जितनी हो हिमालय की ऊँचाई
चाहे जितनी हो हिमालय की ऊँचाई
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
औरत बुद्ध नहीं हो सकती
औरत बुद्ध नहीं हो सकती
Surinder blackpen
*मन  में  पर्वत  सी पीर है*
*मन में पर्वत सी पीर है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
3198.*पूर्णिका*
3198.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
एक मीठा सा एहसास
एक मीठा सा एहसास
हिमांशु Kulshrestha
साथ हो एक मगर खूबसूरत तो
साथ हो एक मगर खूबसूरत तो
ओनिका सेतिया 'अनु '
कोई पैग़ाम आएगा (नई ग़ज़ल) Vinit Singh Shayar
कोई पैग़ाम आएगा (नई ग़ज़ल) Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
प्रीति
प्रीति
Mahesh Tiwari 'Ayan'
#drarunkumarshastri
#drarunkumarshastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
शक्कर की माटी
शक्कर की माटी
विजय कुमार नामदेव
अज्ञानी की कलम
अज्ञानी की कलम
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
कोई आयत सुनाओ सब्र की क़ुरान से,
कोई आयत सुनाओ सब्र की क़ुरान से,
Vishal babu (vishu)
गंणतंत्रदिवस
गंणतंत्रदिवस
Bodhisatva kastooriya
छल ......
छल ......
sushil sarna
जिंदगी है खाली गागर देख लो।
जिंदगी है खाली गागर देख लो।
सत्य कुमार प्रेमी
चुनौतियाँ बहुत आयी है,
चुनौतियाँ बहुत आयी है,
Dr. Man Mohan Krishna
Loading...