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29 Oct 2022 · 1 min read

*चाय (कुंडलिया)*

*चाय (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
पहले कप से चाय के ,खुलती कहाँ खुमार
चस्का जिसको लग गया ,पीता है दो बार
पीता है दो बार , दूसरा चषक जगाता
पेय चाय क्या वाह , पात्र मस्ती ले आता
कहते रवि कविराय ,जमाना कुछ भी कह ले
सुबह चाहिए चाय ,नहाकर सबसे पहले
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“”””””””””””””””””””””””””””””'”””‘”””””””””””
चषक = प्याला

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