Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jan 2024 · 1 min read

गीत

यदि हम राम आगमन पर भी कोई कविता नहीं लिख सके,
तो क्या हम को पाप लगेगा ?

यूँ तो हम ने जाने कितनी बार पढ़ी मानस चौपाई
जाने कितनी बार सियावर राम चंद्र की जय जय गाई
हनूमान का रुप समझकर बंदर को गुड़धानी बाँटी
भली भाँति की क्षमा याचना जब भी डाल हरेरी काटी।

लेकिन इस देखा देखी में छत पर झंडा नहीं रख सके।
तो क्या हम को पाप लगेगा ?

मन में गाया पर जुलूस में जै श्री राम नहीं चिल्लाया
राम आयेंगे, राम आयेंगे जैसा गीत नहीं दोहराया
हमने डी पी, रिंगटोन में धुन, तस्वीर नहीं चिपकाई
और अभी तक स्टेटस पर, भी तस्वीर नहीं लग पाई।

मिले हुए हैं भक्ति भाव से एजेंडे से नहीं मिल सके।
तो क्या हम को पाप लगेगा ?

हम ने की कोशिश लिख डालें मुक्तक, गीत छंद जैसा कुछ
जब न हुआ तो सोचा लिख लें छुटपुट ग़ज़ल नज़्म जैसा कुछ।
ये भी न हो सका तो सोचा प्रचलित सी तुकबंदी कर लें।
डालें कोई रील, वीडियो, मौके को किस तरह लपक लें।

फिर भी पावनतम अवसर पर, यदि प्रासंगिक नहीं रह सके
तो क्या हम को पाप लगेगा ?
©शिवा अवस्थी

4 Likes · 159 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
छल फरेब की बात, कभी भूले मत करना।
छल फरेब की बात, कभी भूले मत करना।
surenderpal vaidya
"गहराई में बसी है"
Dr. Kishan tandon kranti
राजनीति में ना प्रखर,आते यह बलवान ।
राजनीति में ना प्रखर,आते यह बलवान ।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
राम रावण युद्ध
राम रावण युद्ध
Kanchan verma
प्रिय के प्रयास पर झूठ मूठ सी रूठी हुई सी, लाजवंती के गालों
प्रिय के प्रयास पर झूठ मूठ सी रूठी हुई सी, लाजवंती के गालों
kaustubh Anand chandola
वीर पुत्र, तुम प्रियतम
वीर पुत्र, तुम प्रियतम
संजय कुमार संजू
तू है तसुव्वर में तो ए खुदा !
तू है तसुव्वर में तो ए खुदा !
ओनिका सेतिया 'अनु '
दिल हो काबू में....😂
दिल हो काबू में....😂
Jitendra Chhonkar
तन्हाई
तन्हाई
Rajni kapoor
नारी हूँ मैं
नारी हूँ मैं
Kavi praveen charan
जो दर्द किसी को दे, व्योहार बदल देंगे।
जो दर्द किसी को दे, व्योहार बदल देंगे।
सत्य कुमार प्रेमी
प्रतीक्षा, प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा
प्रतीक्षा, प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
सकारात्मक सोच
सकारात्मक सोच
Dr fauzia Naseem shad
"खूबसूरत आंखें आत्माओं के अंधेरों को रोक देती हैं"
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
सुप्रभात
सुप्रभात
डॉक्टर रागिनी
रेतीले तपते गर्म रास्ते
रेतीले तपते गर्म रास्ते
Atul "Krishn"
"जब मिला उजाला अपनाया
*Author प्रणय प्रभात*
खुद की एक पहचान बनाओ
खुद की एक पहचान बनाओ
Vandna Thakur
अकेले चलने की तो ठानी थी
अकेले चलने की तो ठानी थी
Dr.Kumari Sandhya
गूढ़ बात~
गूढ़ बात~
दिनेश एल० "जैहिंद"
संवेदना का कवि
संवेदना का कवि
Shweta Soni
जंग अहम की
जंग अहम की
Mamta Singh Devaa
आंखों में भरी यादें है
आंखों में भरी यादें है
Rekha khichi
*तलवार है तुम्हारे हाथ में हे देवी माता (घनाक्षरी: सिंह विलो
*तलवार है तुम्हारे हाथ में हे देवी माता (घनाक्षरी: सिंह विलो
Ravi Prakash
प्यार है ही नही ज़माने में
प्यार है ही नही ज़माने में
SHAMA PARVEEN
आरम्भ
आरम्भ
Neeraj Agarwal
अब गांव के घर भी बदल रहे है
अब गांव के घर भी बदल रहे है
पूर्वार्थ
बेटा
बेटा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
2509.पूर्णिका
2509.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
तुम मेरी किताबो की तरह हो,
तुम मेरी किताबो की तरह हो,
Vishal babu (vishu)
Loading...