Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Apr 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

भूख लाचार करती है इंसान को
आदमी बेचता तब है ईमान को

इस सदी में भी अल्फ़ाज़ के अश्म से
कर रहे लोग घायल हैं बेजान को

जख्म़ का सिलसिला आज भी जारी है
फूल तरसा सहर-शाम गुलदान को

नाव काग़ज़ की दफ़्तर से चल तो पड़ी
बाढ़ में कर रही याद हनुमान को

पेट की भूख कितने युवा स्वप्न की
मेट देती अचानक ही मुस्कान को

वे लहू बन इन्हीं आँखों से बह रहे
वक्त अब आ गया पास ऐलान को

जिंदा बुत साथ के साथ बनवा रहे
बुत सुधा कितने तरसे हैं पहचान को

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
3/4/2024

Language: Hindi
45 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
4-मेरे माँ बाप बढ़ के हैं भगवान से
4-मेरे माँ बाप बढ़ के हैं भगवान से
Ajay Kumar Vimal
मुझे किसी को रंग लगाने की जरूरत नहीं
मुझे किसी को रंग लगाने की जरूरत नहीं
Ranjeet kumar patre
करनी होगी जंग
करनी होगी जंग
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
*******खुशी*********
*******खुशी*********
Dr. Vaishali Verma
"फितरत"
Dr. Kishan tandon kranti
*चंदा (बाल कविता)*
*चंदा (बाल कविता)*
Ravi Prakash
खुशी की तलाश
खुशी की तलाश
Sandeep Pande
छोड़ दिया
छोड़ दिया
Srishty Bansal
शेर बेशक़ सुना रही हूँ मैं
शेर बेशक़ सुना रही हूँ मैं
Shweta Soni
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-143के दोहे
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-143के दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
व्यक्ति महिला को सब कुछ देने को तैयार है
व्यक्ति महिला को सब कुछ देने को तैयार है
शेखर सिंह
हाँ मैं किन्नर हूँ…
हाँ मैं किन्नर हूँ…
Anand Kumar
ग़ज़ल/नज़्म - ये प्यार-व्यार का तो बस एक बहाना है
ग़ज़ल/नज़्म - ये प्यार-व्यार का तो बस एक बहाना है
अनिल कुमार
☀️ओज़☀️
☀️ओज़☀️
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
*** चल अकेला.......!!! ***
*** चल अकेला.......!!! ***
VEDANTA PATEL
World Book Day
World Book Day
Tushar Jagawat
उस चाँद की तलाश में
उस चाँद की तलाश में
Diwakar Mahto
// श्री राम मंत्र //
// श्री राम मंत्र //
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
सकारात्मक सोच
सकारात्मक सोच
Neelam Sharma
*औपचारिकता*
*औपचारिकता*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आप अपना कुछ कहते रहें ,  आप अपना कुछ लिखते रहें!  कोई पढ़ें य
आप अपना कुछ कहते रहें , आप अपना कुछ लिखते रहें! कोई पढ़ें य
DrLakshman Jha Parimal
दो जून की रोटी
दो जून की रोटी
Ram Krishan Rastogi
मुक्तक
मुक्तक
sushil sarna
2532.पूर्णिका
2532.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
हज़ारों साल
हज़ारों साल
DR. Kaushal Kishor Shrivastava
शीर्षक - संगीत
शीर्षक - संगीत
Neeraj Agarwal
धानी चूनर में लिपटी है धरती जुलाई में
धानी चूनर में लिपटी है धरती जुलाई में
Anil Mishra Prahari
"दस ढीठों ने ताक़त दे दी,
*Author प्रणय प्रभात*
सुंदरता विचारों में सफर करती है,
सुंदरता विचारों में सफर करती है,
सिद्धार्थ गोरखपुरी
जब पीड़ा से मन फटता है
जब पीड़ा से मन फटता है
पूर्वार्थ
Loading...