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19 Feb 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

पहले दाएँ मुड़कर देखो ।
फिर बाएँ से जुड़कर देखो ।

बैठे हो क्यों पंख सिकोड़े,
खुले गगन में उड़कर देखो ।

फैल – फैल कर फैल गए हो,
अब तो ज़रा सिकुड़कर देखो ।

बहुत चिढ़ाया है बाहर को,
थोड़ा भीतर कुढ़कर देखो ।

दारू, सट्टा, बीड़ी, गाँजा,
इनकी लत से छुड़कर देखो ।

Language: Hindi
2 Likes · 90 Views
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