Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jan 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

अरकान- फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन /फ़इलुन
वज़्न-2122 1212 22/112
बह्र का नाम :-़ बह्रे-ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़्बून महज़ूफ़ मक़्तूअ
क़ाफ़िया:- ज़माने (आने की बंदिश)
रदीफ:- में

गज़ल का मतला
वो तुलें हैं मुझे मिटाने में।
गूँजती हूँ मैं हर फसाने में।

हुस्ने मतला
दिल-ए-शायर हैं सब ज़माने में।
हुस्न जानिब से दिल लगाने में।

मुस्कुराने को मुस्कुराती हूँ,
हर्ज़ क्या यूं ही मुस्कुराने में।

साल-दर-साल और एक लम्हा,
जीस्त बीती तुम्हें भुलाने में।

दिल में तेरा रहा न नाम निशां
वक्त थोड़ा लगा मिटाने में।

रूठ जाती है बहर क्यों मुझसे
देख मिसरे को गुनगुनाने में।

शर्म दहशत झिझक परेशानी
कौन हमदर्द है ज़माने में।।

बाज आये ना हरकतों से तो,
रात तेरी कटेगी थाने में।😂

मक़्ता
खूब शोहरत है मिली नीलम
ना कमी है दिली ख़ज़ाने में।
नीलम शर्मा ✍️

1 Like · 85 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वीर हनुमान
वीर हनुमान
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
गुलशन की पहचान गुलज़ार से होती है,
गुलशन की पहचान गुलज़ार से होती है,
Rajesh Kumar Arjun
तेरे गम का सफर
तेरे गम का सफर
Rajeev Dutta
प्रेम जब निर्मल होता है,
प्रेम जब निर्मल होता है,
हिमांशु Kulshrestha
आग उगलती मेरी क़लम
आग उगलती मेरी क़लम
Shekhar Chandra Mitra
प्यार का बँटवारा
प्यार का बँटवारा
Rajni kapoor
नसीब में था अकेलापन,
नसीब में था अकेलापन,
Umender kumar
बह्र - 1222-1222-122 मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन काफ़िया - आ रदीफ़ -है।
बह्र - 1222-1222-122 मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन काफ़िया - आ रदीफ़ -है।
Neelam Sharma
**वसन्त का स्वागत है*
**वसन्त का स्वागत है*
Mohan Pandey
मैंने, निज मत का दान किया;
मैंने, निज मत का दान किया;
पंकज कुमार कर्ण
कोई आरज़ू नहीं थी
कोई आरज़ू नहीं थी
Dr fauzia Naseem shad
जहाँ खुदा है
जहाँ खुदा है
शेखर सिंह
चलो आज खुद को आजमाते हैं
चलो आज खुद को आजमाते हैं
कवि दीपक बवेजा
नमन माँ गंग !पावन
नमन माँ गंग !पावन
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
मां की कलम से!!!
मां की कलम से!!!
Seema gupta,Alwar
मैंने खुद को जाना, सुना, समझा बहुत है
मैंने खुद को जाना, सुना, समझा बहुत है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
बेपनाह थी मोहब्बत, गर मुकाम मिल जाते
बेपनाह थी मोहब्बत, गर मुकाम मिल जाते
Aditya Prakash
चिंतन और चिता
चिंतन और चिता
VINOD CHAUHAN
लिखा भाग्य में रहा है होकर,
लिखा भाग्य में रहा है होकर,
पूर्वार्थ
Mana ki mohabbat , aduri nhi hoti
Mana ki mohabbat , aduri nhi hoti
Sakshi Tripathi
डर
डर
Sonam Puneet Dubey
अपने  में वो मस्त हैं ,दूसरों की परवाह नहीं ,मित्रता में रहक
अपने में वो मस्त हैं ,दूसरों की परवाह नहीं ,मित्रता में रहक
DrLakshman Jha Parimal
बिन पैसों नहीं कुछ भी, यहाँ कद्र इंसान की
बिन पैसों नहीं कुछ भी, यहाँ कद्र इंसान की
gurudeenverma198
मेरा यार
मेरा यार
rkchaudhary2012
चवपैया छंद , 30 मात्रा (मापनी मुक्त मात्रिक )
चवपैया छंद , 30 मात्रा (मापनी मुक्त मात्रिक )
Subhash Singhai
(22) एक आंसू , एक हँसी !
(22) एक आंसू , एक हँसी !
Kishore Nigam
स्वर्ग से सुन्दर
स्वर्ग से सुन्दर
Dr. Pradeep Kumar Sharma
मेरी हैसियत
मेरी हैसियत
आर एस आघात
धार्मिकता और सांप्रदायिकता / MUSAFIR BAITHA
धार्मिकता और सांप्रदायिकता / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
``बचपन```*
``बचपन```*
Naushaba Suriya
Loading...