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22 Nov 2023 · 1 min read

ग़ज़ल

फूलों सी मुस्कान तुम्हारे अधरों की
कालियाँ हैं पहचान तुम्हारे अधरों की

बोल घोल दो मिस्री सारे आलम में
बातें लगती गान तुम्हारे अधरों की

रंग लाल बन जाते सारे पल्लव के
कर ले ज़रा सी भान तुम्हारे अधरों की

कलियाँ छूते रहते अक्सर जान तुम्हें
भँवरे कर गुणगान तुम्हारे अधरों की

समझे अमृत अधर सिक्त जो देख तेरी
करते रहते पान तुम्हारे अधरों की

मौसम ढ़ल जाता है रात औ शाम में
देख महज़ बिहान तुम्हारे अधरों की

Language: Hindi
1 Like · 1 Comment · 135 Views
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