Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 May 2022 · 1 min read

ग़ज़ल

कभ्भो पत्थर भी फूल हो जाला ..
प्यार से जब कुबूल हो जाला
जेकरा काँटा भरल ह मनवा में
फूल ओकरा फिज़ूल हो जाला.
जब चले मन में तीन कै तेरह
बिना चहले भी भूल हो जाला
कर्ज एहसान कै जे खा जाला
ब्याज सम्मित वसूल हो जाला
जे ‘महज़’ सब बेकार देखेला
ओके कुमकुम भी धूल हो जाला

2 Likes · 157 Views
You may also like:
जज़्बातों की धुंध, जब दिलों को देगा देती है, मेरे...
Manisha Manjari
काँटों में खिलो फूल-सम, औ दिव्य ओज लो।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
मेरी बेटी है, मेरा वारिस।
लक्ष्मी सिंह
💐प्रेम की राह पर-75💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
भोरे
spshukla09179
মিথিলা অক্ষর
DrLakshman Jha Parimal
पुस्तक समीक्षा
Ravi Prakash
मृत्यु
Anamika Singh
✍️पेड़ की आत्मकथा✍️
'अशांत' शेखर
आशाओं के दीप जलाए थे मैने
Ram Krishan Rastogi
तितली
Shyam Sundar Subramanian
हालात
Surabhi bharati
थोड़ी मेहनत और कर लो
Nitu Sah
एक झूठा और ब्रह्म सत्य
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
डरता हूं
dks.lhp
इश्क कोई बुरी बात नहीं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
दिन रात।
Taj Mohammad
"आधुनिक काल के महानतम् गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन्"
Pravesh Shinde
*!* कच्ची बुनियाद जिन्दगी की *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
'आप नहीं आएंगे अब पापा'
alkaagarwal.ag
सावधान हो जाओ, मुफ्त रेवड़ियां बांटने बालों
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अक्ल के अंधे
Shekhar Chandra Mitra
" मीनू की परछाई रानू "
Dr Meenu Poonia
आदमी आदमी से डरने लगा है
VINOD KUMAR CHAUHAN
किसी को क्या खबर है
shabina. Naaz
* आडे तिरछे अनुप्राण *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गर्म साँसें,जल रहा मन / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बेटी की विदाई
प्रीतम श्रावस्तवी
प्रात का निर्मल पहर है
मनोज कर्ण
भोलाराम का भोलापन
विनोद सिल्ला
Loading...