Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Jan 2023 · 1 min read

गम को भुलाया जाए

ग़ज़ल

साथ कुछ आज चलो वक्त बिताया जाए
अब घड़ी भर के लिए गम को भुलाया जाए

हार माने जो किनारे ही रहे दरिया के
ज़िंदगी इक है समर पाठ पढ़ाया जाए

रोशनी को जो तरसते ही रहे उनके भी
आशियानों में दिया चल के जलाया जाए

भ्रष्ट जो तंत्र हुआ लूट रहे घर अपने
अब जरूरी है कि हर शक्स जगाया जाए

हौसले टूट रहे जिनके धरा पे दिन-दिन
पंख देकर भी सुधा उनको उड़ाया जाए

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
15/1/2023
वाराणसी,©®

Language: Hindi
214 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
एकांत
एकांत
DR ARUN KUMAR SHASTRI
हर दिन एक नई शुरुआत हैं।
हर दिन एक नई शुरुआत हैं।
Sangeeta Beniwal
मिसरे जो मशहूर हो गये- राना लिधौरी
मिसरे जो मशहूर हो गये- राना लिधौरी
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
हमेशा समय के साथ चलें,
हमेशा समय के साथ चलें,
नेताम आर सी
हुआ क्या तोड़ आयी प्रीत को जो  एक  है  नारी
हुआ क्या तोड़ आयी प्रीत को जो एक है नारी
Anil Mishra Prahari
रंगों का कोई धर्म नहीं होता होली हमें यही सिखाती है ..
रंगों का कोई धर्म नहीं होता होली हमें यही सिखाती है ..
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
मोहल्ले में थानेदार (हास्य व्यंग्य)
मोहल्ले में थानेदार (हास्य व्यंग्य)
Ravi Prakash
चुनाव का मौसम
चुनाव का मौसम
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सवाल ये नहीं
सवाल ये नहीं
Dr fauzia Naseem shad
जीवन में समय होता हैं
जीवन में समय होता हैं
Neeraj Agarwal
सच समझने में चूका तंत्र सारा
सच समझने में चूका तंत्र सारा
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
बचपन खो गया....
बचपन खो गया....
Ashish shukla
सुख दुःख
सुख दुःख
जगदीश लववंशी
हुकुम की नई हिदायत है
हुकुम की नई हिदायत है
Ajay Mishra
काश.......
काश.......
Faiza Tasleem
फूल और तुम
फूल और तुम
Sidhant Sharma
पारिजात छंद
पारिजात छंद
Neelam Sharma
भुलाना ग़लतियाँ सबकी सबक पर याद रख लेना
भुलाना ग़लतियाँ सबकी सबक पर याद रख लेना
आर.एस. 'प्रीतम'
Stages Of Love
Stages Of Love
Vedha Singh
हम भारत के लोग उड़ाते
हम भारत के लोग उड़ाते
Satish Srijan
"शुभचिन्तक"
Dr. Kishan tandon kranti
मतलबी ज़माना है.
मतलबी ज़माना है.
शेखर सिंह
तो तुम कैसे रण जीतोगे, यदि स्वीकार करोगे हार?
तो तुम कैसे रण जीतोगे, यदि स्वीकार करोगे हार?
महेश चन्द्र त्रिपाठी
जब सावन का मौसम आता
जब सावन का मौसम आता
लक्ष्मी सिंह
■ शुभागमन गणराज 💐
■ शुभागमन गणराज 💐
*प्रणय प्रभात*
पिछले पन्ने 9
पिछले पन्ने 9
Paras Nath Jha
दिल ये इज़हार कहां करता है
दिल ये इज़हार कहां करता है
Surinder blackpen
2896.*पूर्णिका*
2896.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
चाँद नभ से दूर चला, खड़ी अमावस मौन।
चाँद नभ से दूर चला, खड़ी अमावस मौन।
डॉ.सीमा अग्रवाल
अश्रुऔ की धारा बह रही
अश्रुऔ की धारा बह रही
Harminder Kaur
Loading...