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21 Jul 2016 · 1 min read

गजल

अमन के रास्ते गीले नहीं थे
शहर के शख्स पथरीले नहीं थे

निभाते थे सभी मिलकर वफायें
यहाँ इन्सान जहरीले नहीं थे

जुबां दे दी अगर तो बात पक्की
कभी वादों के रेतीले नहीं थे

मिला करते हैं पग-पग पर उछल कर
ये धोखे तेज फुर्तीले नहीं थे

गले मिलना चहक कर बात करना
इन्हीं अादत में शर्मीले नहीं थे

*************************************

सोमनाथ शुक्ल
इलाहाबाद

Language: Hindi
2 Comments · 649 Views
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