Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 May 2023 · 1 min read

गं गणपत्ये ! माँ कमले !

गं गणपत्ये!
विघ्न हर ले,
डिगूँ न कर्म से,
बुद्धि – वर दे,

मांँ कमले!
तम हर ले,
अज्ञान दूर कर
ज्ञान भर दे,

ज्ञान मनुज का
है आभूषण,
बुद्धि; धन का
करता आवाहन,

धन से वैभव
और प्रतिष्ठा,
बढ़ता संस्कार
कर्तव्यनिष्ठा,

मंत्रमुग्ध हम,
उन किसान सम,
जिनके खेतों में
हरियाली,

भाग्य हमारे
जगमग जैसे
दिन दशहरा,
रात दिवाली।

मौलिक व स्वरचित
©® श्री रमण
बेगूसराय (बिहार)

3 Likes · 202 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ. श्री रमण 'श्रीपद्'
View all
You may also like:
गुम सूम क्यूँ बैठी हैं जरा ये अधर अपने अलग कीजिए ,
गुम सूम क्यूँ बैठी हैं जरा ये अधर अपने अलग कीजिए ,
Sukoon
--जो फेमस होता है, वो रूखसत हो जाता है --
--जो फेमस होता है, वो रूखसत हो जाता है --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जीवन के उलझे तार न सुलझाता कोई,
जीवन के उलझे तार न सुलझाता कोई,
Priya princess panwar
कलम की वेदना (गीत)
कलम की वेदना (गीत)
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
समय को समय देकर तो देखो, एक दिन सवालों के जवाब ये लाएगा,
समय को समय देकर तो देखो, एक दिन सवालों के जवाब ये लाएगा,
Manisha Manjari
... बीते लम्हे
... बीते लम्हे
Naushaba Suriya
कुछ तो याद होगा
कुछ तो याद होगा
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
कहमुकरी
कहमुकरी
डॉ.सीमा अग्रवाल
आज पुराने ख़त का, संदूक में द़ीद़ार होता है,
आज पुराने ख़त का, संदूक में द़ीद़ार होता है,
SPK Sachin Lodhi
फेसबुक की बनिया–बुद्धि / मुसाफ़िर बैठा
फेसबुक की बनिया–बुद्धि / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
संत कबीर
संत कबीर
Lekh Raj Chauhan
नववर्ष 2024 की अशेष हार्दिक शुभकामनाएँ(Happy New year 2024)
नववर्ष 2024 की अशेष हार्दिक शुभकामनाएँ(Happy New year 2024)
आर.एस. 'प्रीतम'
■ दो सवाल...
■ दो सवाल...
*Author प्रणय प्रभात*
जीवन छोटा सा कविता
जीवन छोटा सा कविता
कार्तिक नितिन शर्मा
Avinash
Avinash
Vipin Singh
लिखता हम त मैथिल छी ,मैथिली हम नहि बाजि सकैत छी !बच्चा सभक स
लिखता हम त मैथिल छी ,मैथिली हम नहि बाजि सकैत छी !बच्चा सभक स
DrLakshman Jha Parimal
कविता के मीत प्रवासी- से
कविता के मीत प्रवासी- से
प्रो०लक्ष्मीकांत शर्मा
23/168.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/168.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बंदूक की गोली से,
बंदूक की गोली से,
नेताम आर सी
गुलाब के काॅंटे
गुलाब के काॅंटे
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
रिश्तों को साधने में बहुत टूटते रहे
रिश्तों को साधने में बहुत टूटते रहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
लोग खुश होते हैं तब
लोग खुश होते हैं तब
gurudeenverma198
आईना अब भी मुझसे
आईना अब भी मुझसे
Satish Srijan
रूप जिसका आयतन है, नेत्र जिसका लोक है
रूप जिसका आयतन है, नेत्र जिसका लोक है
महेश चन्द्र त्रिपाठी
मस्ती हो मौसम में तो,पिचकारी अच्छी लगती है (हिंदी गजल/गीतिका
मस्ती हो मौसम में तो,पिचकारी अच्छी लगती है (हिंदी गजल/गीतिका
Ravi Prakash
* मुक्तक *
* मुक्तक *
surenderpal vaidya
अपना पराया
अपना पराया
Dr. Pradeep Kumar Sharma
प्रेममे जे गम्भीर रहै छैप्राय: खेल ओेकरे साथ खेल खेलाएल जाइ
प्रेममे जे गम्भीर रहै छैप्राय: खेल ओेकरे साथ खेल खेलाएल जाइ
गजेन्द्र गजुर ( Gajendra Gajur )
नारी कब होगी अत्याचारों से मुक्त?
नारी कब होगी अत्याचारों से मुक्त?
कवि रमेशराज
Loading...