Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Feb 2023 · 1 min read

*खूब थी जिंदा कि ज्यों, पुस्तक पुरानी कोई वह (मुक्तक)*

खूब थी जिंदा कि ज्यों, पुस्तक पुरानी कोई वह (मुक्तक)
_________________________
बंद थी संदूक में, पुस्तक पुरानी सोई वह
धूल जब की साफ तो, पुस्तक पुरानी रोई वह
खो-खो गई अपना विगत, वैभव-विमोचन याद कर
खूब थी जिंदा कि ज्यों, पुस्तक पुरानी कोई वह
—————————————-
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

Language: Hindi
145 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
*देश का दर्द (मणिपुर से आहत)*
*देश का दर्द (मणिपुर से आहत)*
Dushyant Kumar
मानव हो मानवता धरो
मानव हो मानवता धरो
Mrs PUSHPA SHARMA {पुष्पा शर्मा अपराजिता}
शीर्षक तेरी रुप
शीर्षक तेरी रुप
Neeraj Agarwal
फ़ासले जब भी
फ़ासले जब भी
Dr fauzia Naseem shad
बाबूजी।
बाबूजी।
Anil Mishra Prahari
मंजिलें
मंजिलें
Santosh Shrivastava
"सूरत और सीरत"
Dr. Kishan tandon kranti
प्यार मेरा बना सितारा है --
प्यार मेरा बना सितारा है --
Seema Garg
माइल है दर्दे-ज़ीस्त,मिरे जिस्मो-जाँ के बीच
माइल है दर्दे-ज़ीस्त,मिरे जिस्मो-जाँ के बीच
Sarfaraz Ahmed Aasee
दोहा समीक्षा- राजीव नामदेव राना लिधौरी
दोहा समीक्षा- राजीव नामदेव राना लिधौरी
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
नलिनी छंद /भ्रमरावली छंद
नलिनी छंद /भ्रमरावली छंद
Subhash Singhai
वैशाख की धूप
वैशाख की धूप
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
* शक्ति स्वरूपा *
* शक्ति स्वरूपा *
surenderpal vaidya
फ़ितरत
फ़ितरत
Ahtesham Ahmad
"शर्म मुझे आती है खुद पर, आखिर हम क्यों मजदूर हुए"
Anand Kumar
हार से डरता क्यों हैं।
हार से डरता क्यों हैं।
Yogi Yogendra Sharma : Motivational Speaker
खुदा की हर बात सही
खुदा की हर बात सही
Harminder Kaur
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्थिता
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्थिता
Sandeep Kumar
सिपाहियों के दस्ता कर रहें गस्त हैं,
सिपाहियों के दस्ता कर रहें गस्त हैं,
Satish Srijan
गुमराह जिंदगी में अब चाह है किसे
गुमराह जिंदगी में अब चाह है किसे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
*चलते रहे जो थाम, मर्यादा-ध्वजा अविराम हैं (मुक्तक)*
*चलते रहे जो थाम, मर्यादा-ध्वजा अविराम हैं (मुक्तक)*
Ravi Prakash
विश्वास करो
विश्वास करो
TARAN VERMA
■ मंगलकामनाएं
■ मंगलकामनाएं
*प्रणय प्रभात*
आदि ब्रह्म है राम
आदि ब्रह्म है राम
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मात्र क्षणिक आनन्द को,
मात्र क्षणिक आनन्द को,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
2321.पूर्णिका
2321.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
🍂🍂🍂🍂*अपना गुरुकुल*🍂🍂🍂🍂
🍂🍂🍂🍂*अपना गुरुकुल*🍂🍂🍂🍂
Dr. Vaishali Verma
हिंदी दिवस पर विशेष
हिंदी दिवस पर विशेष
Akash Yadav
एक महिला की उमर और उसकी प्रजनन दर उसके शारीरिक बनावट से साफ
एक महिला की उमर और उसकी प्रजनन दर उसके शारीरिक बनावट से साफ
Rj Anand Prajapati
यह जीवन अनमोल रे
यह जीवन अनमोल रे
विजय कुमार अग्रवाल
Loading...