Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Dec 2022 · 1 min read

क्यों इतना मुश्किल है

किसी को भूल पाना , क्यों इतना मुश्किल है?
इश्क़ के खंजर से , बिस्मिल क्यों दिल है?

बसर हो जिनकी जिंदगी, चांदनी के साये में
ये तेज़ धूप तो ,उनके लिए क़ातिल है।

साफगोई तेरी,तेरे कुछ काम न आ सकेगी
सामना का शख्स, बहुत ही तंगदिल है।

भरोसा अपनी काबिलियत पर करें तो तू कैसे
मन तेरे का चोर ,बहुत ही नाकाबिल है।

आंखों में मै अपने नये सपने कैसे सजाऊ
अश्कों के बोझ से,आंखें तो बोझिल है।

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
1 Like · 2 Comments · 230 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Surinder blackpen
View all
You may also like:
"फर्क"
Dr. Kishan tandon kranti
कभी भ्रम में मत जाना।
कभी भ्रम में मत जाना।
surenderpal vaidya
जी रहे हैं सब इस शहर में बेज़ार से
जी रहे हैं सब इस शहर में बेज़ार से
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हिन्दी दोहा बिषय- तारे
हिन्दी दोहा बिषय- तारे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
*ये रिश्ते ,रिश्ते न रहे इम्तहान हो गए हैं*
*ये रिश्ते ,रिश्ते न रहे इम्तहान हो गए हैं*
Shashi kala vyas
जय जय राजस्थान
जय जय राजस्थान
Ravi Yadav
दोहे-*
दोहे-*
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
हम कहाँ जा रहे हैं...
हम कहाँ जा रहे हैं...
Radhakishan R. Mundhra
विनम्रता
विनम्रता
Bodhisatva kastooriya
गणेश वंदना
गणेश वंदना
Sushil Pandey
गर सीरत की चाह हो तो लाना घर रिश्ता।
गर सीरत की चाह हो तो लाना घर रिश्ता।
Taj Mohammad
आग लगाते लोग
आग लगाते लोग
DR. Kaushal Kishor Shrivastava
रिश्ता और परिवार की तोहमत की वजह सिर्फ ज्ञान और अनुभव का अहम
रिश्ता और परिवार की तोहमत की वजह सिर्फ ज्ञान और अनुभव का अहम
पूर्वार्थ
फितरत
फितरत
Sukoon
जाने क्या छुटा रहा मुझसे
जाने क्या छुटा रहा मुझसे
Sandhya Chaturvedi(काव्यसंध्या)
कड़वाहट के मूल में,
कड़वाहट के मूल में,
sushil sarna
यूनिवर्सल सिविल कोड
यूनिवर्सल सिविल कोड
Dr. Harvinder Singh Bakshi
#लघुकथा-
#लघुकथा-
*Author प्रणय प्रभात*
खुदा को ढूँढा दैरो -हरम में
खुदा को ढूँढा दैरो -हरम में
shabina. Naaz
कभी कभी ज़िंदगी में लिया गया छोटा निर्णय भी बाद के दिनों में
कभी कभी ज़िंदगी में लिया गया छोटा निर्णय भी बाद के दिनों में
Paras Nath Jha
गुरु दीक्षा
गुरु दीक्षा
GOVIND UIKEY
3390⚘ *पूर्णिका* ⚘
3390⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
प्रेम भरे कभी खत लिखते थे
प्रेम भरे कभी खत लिखते थे
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
बांध रखा हूं खुद को,
बांध रखा हूं खुद को,
Shubham Pandey (S P)
दिल का सौदा
दिल का सौदा
सरिता सिंह
गले लगाना पड़ता है
गले लगाना पड़ता है
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
इम्तिहान
इम्तिहान
AJAY AMITABH SUMAN
शिव मिल शिव बन जाता
शिव मिल शिव बन जाता
Satish Srijan
" आज़ का आदमी "
Chunnu Lal Gupta
(1) मैं जिन्दगी हूँ !
(1) मैं जिन्दगी हूँ !
Kishore Nigam
Loading...