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3 Oct 2016 · 1 min read

कौन उजाला लाएगा

वतन को रिश्वतों के रिवाज़ में जकड़ बैठे है,
कैसे ज़ाहिल लोग कुर्सियां पकड़ बैठे है।
**** ****

इस देश का ईमान बेईमान के हाथो में है,
हर इक काम नाकाम के हाथों में है।
कौन उजाला लाएगा ‘दवे’ तेरे प्यारे वतन में,
बेसहारा है सूरज, शाम के हाथों में है।
**** ****

Language: Hindi
Tag: शेर
497 Views
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