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1 Jun 2016 · 1 min read

कोयला होता कभी हीरा नहीं

सर घमण्डी का रहे ऊँचा नहीं
कोयला होता कभी हीरा नहीं

खूब जी लो वक़्त का हर पल यहाँ
लौट कर आता गया लम्हा नहीं

पाप पुण्यों का अलग खाता बने
इसमें होता है कभी साझा नहीं

तोड़ देता आदमी को टूट कर
पर बिखरता खुद कभी वादा नहीं

मांग लेना दिल के बदले में ही दिल
प्यार कहते हैं इसे सौदा नहीं

फासला भी स्वप्न मंज़िल में बड़ा
रास्ता भी तो मिले सीधा नहीं

अर्चना कटती नहीं ये ज़िन्दगी
अपनों का मिलता अगर शाना नहीं

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद(उप्र )

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