Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 May 2023 · 1 min read

कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं,

कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं,

मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं….

विशाल बाबू ✍️

1 Like · 130 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Behaviour of your relatives..
Behaviour of your relatives..
Suryash Gupta
बरसात
बरसात
लक्ष्मी सिंह
प्रभु का प्राकट्य
प्रभु का प्राकट्य
Anamika Tiwari 'annpurna '
सत्य को अपना बना लो,
सत्य को अपना बना लो,
Buddha Prakash
उसकी आंखों से छलकता प्यार
उसकी आंखों से छलकता प्यार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
If we’re just getting to know each other…call me…don’t text.
If we’re just getting to know each other…call me…don’t text.
पूर्वार्थ
The Lost Umbrella
The Lost Umbrella
R. H. SRIDEVI
गर कभी आओ मेरे घर....
गर कभी आओ मेरे घर....
Santosh Soni
हंसकर मुझे तू कर विदा
हंसकर मुझे तू कर विदा
gurudeenverma198
Dr arun kumar shastri
Dr arun kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मातृत्व
मातृत्व
साहित्य गौरव
ना वह हवा ना पानी है अब
ना वह हवा ना पानी है अब
VINOD CHAUHAN
अपने दिल से
अपने दिल से
Dr fauzia Naseem shad
प्रेम अपाहिज ठगा ठगा सा, कली भरोसे की कुम्हलाईं।
प्रेम अपाहिज ठगा ठगा सा, कली भरोसे की कुम्हलाईं।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
धर्म खतरे में है.. का अर्थ
धर्म खतरे में है.. का अर्थ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
पिता
पिता
Neeraj Agarwal
दीवार का साया
दीवार का साया
Dr. Rajeev Jain
अगर सीता स्वर्ण हिरण चाहेंगी....
अगर सीता स्वर्ण हिरण चाहेंगी....
Vishal babu (vishu)
बगिया के गाछी आउर भिखमंगनी बुढ़िया / MUSAFIR BAITHA
बगिया के गाछी आउर भिखमंगनी बुढ़िया / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
🙅आज का मैच🙅
🙅आज का मैच🙅
*Author प्रणय प्रभात*
जीवनमंथन
जीवनमंथन
Shyam Sundar Subramanian
*साठ साल के हुए बेचारे पतिदेव (हास्य व्यंग्य)*
*साठ साल के हुए बेचारे पतिदेव (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
मुसलसल ईमान-
मुसलसल ईमान-
Bodhisatva kastooriya
" मंजिल का पता ना दो "
Aarti sirsat
देशभक्त
देशभक्त
Shekhar Chandra Mitra
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
क्वालिटी टाइम
क्वालिटी टाइम
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सुबह आंख लग गई
सुबह आंख लग गई
Ashwani Kumar Jaiswal
पिला रही हो दूध क्यों,
पिला रही हो दूध क्यों,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Banaras
Banaras
Sahil Ahmad
Loading...