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25 Aug 2019 · 1 min read

कृष्ण भक्ति

इन्द्रवज्रा छंद

221 221 121 22

आओ मुरारी दर पे पड़ा हूँ।
साथी सुदामा बन के खड़ा हूँ।।
क्या मैं बताऊँ कह के सुनाऊँ।
कैसे कहो मैं दुख को छुपाऊँ।।

धोती फटी है दिखता भिखारी।
टूटी हुई है हमरी अटारी।।
लेते परीक्षा तुम क्यों मुरारी।
देखो दशा क्या अब है हमारी।।

आवाज मेरी पहुँची नहीं क्या।
बोलो कन्हैया गलती हुई क्या।।
कोई नहीं है जग में हमारा।
आओ मुरारी दिल ने पुकारा।

दानी बडे़ हो तुम हो विधाता।
प्रेमी पुराना कब से बुलाता।।
पीड़ा मिटाओ हमको उबारो।
देदो सहारा अब श्याम तारो।।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

Language: Hindi
Tag: गीतिका
4 Likes · 1 Comment · 267 Views

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