Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 May 2023 · 1 min read

कुछ नमी

कुछ नमी अपने साथ लाता है ।
जब भी तेरा ख़याल आता है।।

देख कर ही सुकून मिलता है ।
तेरा चेहरा नज़र को भाता है ।।

कुछ भी रहता नहीं है यादों में ।
वक़्त लम्हों में बीत जाता है ।।

रास्तों पर सभी तो चलते हैं ।
कौन मंज़िल को अपनी पाता है ।।

मैं भी हो जाती हूँ ग़ज़ल जैसी ।
वो ग़ज़ल जब कभी सुनाता है ।।

-डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
12 Likes · 2 Comments · 474 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
बाल नहीं खुले तो जुल्फ कह गयी।
बाल नहीं खुले तो जुल्फ कह गयी।
Anil chobisa
घर
घर
Dheerja Sharma
परिवार, घड़ी की सूइयों जैसा होना चाहिए कोई छोटा हो, कोई बड़ा
परिवार, घड़ी की सूइयों जैसा होना चाहिए कोई छोटा हो, कोई बड़ा
ललकार भारद्वाज
कहानी-
कहानी- "खरीदी हुई औरत।" प्रतिभा सुमन शर्मा
Pratibhasharma
शिमला, मनाली, न नैनीताल देता है
शिमला, मनाली, न नैनीताल देता है
Anil Mishra Prahari
पृथ्वी दिवस
पृथ्वी दिवस
Bodhisatva kastooriya
इससे सुंदर कोई नही लिख सकता 👌👌 मन की बात 👍बहुत सुंदर लिखा है
इससे सुंदर कोई नही लिख सकता 👌👌 मन की बात 👍बहुत सुंदर लिखा है
Rachna Mishra
कहने का मौका तो दिया था तुने मगर
कहने का मौका तो दिया था तुने मगर
Swami Ganganiya
""बहुत दिनों से दूर थे तुमसे _
Rajesh vyas
* गीत कोई *
* गीत कोई *
surenderpal vaidya
किसी की किस्मत संवार के देखो
किसी की किस्मत संवार के देखो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कोई आदत नहीं
कोई आदत नहीं
Dr fauzia Naseem shad
नए साल की नई सुबह पर,
नए साल की नई सुबह पर,
Anamika Singh
*अध्याय 11*
*अध्याय 11*
Ravi Prakash
अरमान
अरमान
अखिलेश 'अखिल'
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Shyam Sundar Subramanian
उदयमान सूरज साक्षी है ,
उदयमान सूरज साक्षी है ,
Vivek Mishra
माँ महान है
माँ महान है
Dr. Man Mohan Krishna
"सैल्यूट"
Dr. Kishan tandon kranti
सोच विभाजनकारी हो
सोच विभाजनकारी हो
*Author प्रणय प्रभात*
स्वदेशी
स्वदेशी
विजय कुमार अग्रवाल
बचा  सको तो  बचा  लो किरदारे..इंसा को....
बचा सको तो बचा लो किरदारे..इंसा को....
shabina. Naaz
पहाड़ की सोच हम रखते हैं।
पहाड़ की सोच हम रखते हैं।
Neeraj Agarwal
बस कुछ दिन और फिर हैप्पी न्यू ईयर और सेम टू यू का ऐसा तांडव
बस कुछ दिन और फिर हैप्पी न्यू ईयर और सेम टू यू का ऐसा तांडव
Ranjeet kumar patre
अंतस के उद्वेग हैं ,
अंतस के उद्वेग हैं ,
sushil sarna
शब्द
शब्द
Paras Nath Jha
धरा कठोर भले हो कितनी,
धरा कठोर भले हो कितनी,
Satish Srijan
दिल ये तो जानता हैं गुनाहगार कौन हैं,
दिल ये तो जानता हैं गुनाहगार कौन हैं,
Vishal babu (vishu)
यदि आप नंगे है ,
यदि आप नंगे है ,
शेखर सिंह
23/86.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/86.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...