Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Jan 2024 · 1 min read

कि लड़का अब मैं वो नहीं

कि लड़का अब मैं वो नहीं
और लड़की तू अब वो नहीं
थी कभी तेरे चेहरे पे सादगी
दिखती, अब वो नहीं
रहते दोनों शून्य से
बेफिक्री अब हैं नहीं
हस्ता अब मैं नहीं
रोती अब तू नहीं
क्यूंकि, मुझमें अब मैं नहीं
तुझमें अब तू नहीं

The_dk_poetry

1 Like · 86 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ढलती हुई दीवार ।
ढलती हुई दीवार ।
Manisha Manjari
इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा।
इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
शुभ रात्रि मित्रों.. ग़ज़ल के तीन शेर
शुभ रात्रि मित्रों.. ग़ज़ल के तीन शेर
आर.एस. 'प्रीतम'
*न जाने रोग है कोई, या है तेरी मेहरबानी【मुक्तक】*
*न जाने रोग है कोई, या है तेरी मेहरबानी【मुक्तक】*
Ravi Prakash
आत्म संयम दृढ़ रखों, बीजक क्रीड़ा आधार में।
आत्म संयम दृढ़ रखों, बीजक क्रीड़ा आधार में।
Er.Navaneet R Shandily
"प्यासा"-हुनर
Vijay kumar Pandey
खाक मुझको भी होना है
खाक मुझको भी होना है
VINOD CHAUHAN
"ख़ामोशी"
Pushpraj Anant
तुम्हारी आंखों का रंग हमे भाता है
तुम्हारी आंखों का रंग हमे भाता है
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
ज़िंदगी बन गई है सूखा शज़र।
ज़िंदगी बन गई है सूखा शज़र।
Surinder blackpen
हवाएं रुख में आ जाएं टीलो को गुमशुदा कर देती हैं
हवाएं रुख में आ जाएं टीलो को गुमशुदा कर देती हैं
कवि दीपक बवेजा
आहट
आहट
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
ब्याहता
ब्याहता
Dr. Kishan tandon kranti
‘‘शिक्षा में क्रान्ति’’
‘‘शिक्षा में क्रान्ति’’
Mr. Rajesh Lathwal Chirana
मैं नही चाहती किसी के जैसे बनना
मैं नही चाहती किसी के जैसे बनना
ruby kumari
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
Dr Archana Gupta
मेला झ्क आस दिलों का ✍️✍️
मेला झ्क आस दिलों का ✍️✍️
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
शीर्षक - बुढ़ापा
शीर्षक - बुढ़ापा
Neeraj Agarwal
तू जाएगा मुझे छोड़ कर तो ये दर्द सह भी लेगे
तू जाएगा मुझे छोड़ कर तो ये दर्द सह भी लेगे
कृष्णकांत गुर्जर
कोई हंस रहा है कोई रो रहा है 【निर्गुण भजन】
कोई हंस रहा है कोई रो रहा है 【निर्गुण भजन】
Khaimsingh Saini
दृढ़ आत्मबल की दरकार
दृढ़ आत्मबल की दरकार
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
बहुत कुछ बोल सकता हु,
बहुत कुछ बोल सकता हु,
Awneesh kumar
■ लघुकथा....
■ लघुकथा....
*Author प्रणय प्रभात*
बिहार दिवस  (22 मार्च 2023, 111 वां स्थापना दिवस)
बिहार दिवस  (22 मार्च 2023, 111 वां स्थापना दिवस)
रुपेश कुमार
समाप्त वर्ष 2023 मे अगर मैने किसी का मन व्यवहार वाणी से किसी
समाप्त वर्ष 2023 मे अगर मैने किसी का मन व्यवहार वाणी से किसी
Ranjeet kumar patre
आप सुनो तो तान छेड़ दूं
आप सुनो तो तान छेड़ दूं
Suryakant Dwivedi
परिवार के लिए
परिवार के लिए
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Wait ( Intezaar)a precious moment of life:
Wait ( Intezaar)a precious moment of life:
पूर्वार्थ
माता रानी की भेंट
माता रानी की भेंट
umesh mehra
A Donkey and A Lady
A Donkey and A Lady
AJAY AMITABH SUMAN
Loading...