Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Sep 2022 · 1 min read

किस बात तुम्हें अभिमान है प्राणी!

किस बात का तुम्हें इतना
गुमान है ऐ प्राणी।
जब तेरे हाथ में नहीं है
तेरे जीवन का कमान प्राणी।
मत भूलो तुम यहाँ पर हो
कुछ दिनों का मेहमान प्राणी।
जिस धन-दौलत के लिए तुम
भागते रहते हो सुबह-शाम,
मत भूलो यहीं छोड़कर जाना है
तुम्हें सारा सामान प्राणी।
फिर किस बात का है तुम्हें
इतना अभिमान प्राणी।
क्यों दिन-रात लूट-खसोट कर
तुम सबको करते रहते हो परेशान प्राणी,
क्यों लड़ाई -झगड़ों में तुम अपना
यह अनमोल समय गवाते हो प्राणी।
क्यो जात-पात,मजहब -धर्म के नाम,
एक-दूसरे को करते हो अपमान प्राणी।
जब जाओगे यहाँ से, खाली तुम्हें जाना है।
इस मिट्टी के तन को भी यहीं छोड़कर जाना है ।
जिस पर तुमने लगाया है अपना,
यह जात-पात,मजहब-धर्म का मुहर प्राणी।
ऊपर वाला तो बस तेरे आत्मा को ले जाएगा,
उसकी शुद्धता को जाँचेगा और अपने साथ ले जाएगा।
छलकपट करके तुम इसका बोझ न बढा प्राणी,
नही तो तेरा आत्मा भी यही भटकता रह जाएगा,
फिर कहाँ उसे मुक्ति मिल पाएगा प्राणी।

Language: Hindi
Tag: गीत
5 Likes · 7 Comments · 227 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Kuch nahi hai.... Mager yakin to hai  zindagi  kam hi  sahi.
Kuch nahi hai.... Mager yakin to hai zindagi kam hi sahi.
Rekha Rajput
2317.पूर्णिका
2317.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
पटेबाज़
पटेबाज़
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
मेरी मुस्कान भी, अब नागवार है लगे उनको,
मेरी मुस्कान भी, अब नागवार है लगे उनको,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
■ लघु व्यंग्य-
■ लघु व्यंग्य-
*Author प्रणय प्रभात*
रे, मन
रे, मन
Chunnu Lal Gupta
Bato ki garma garmi me
Bato ki garma garmi me
Sakshi Tripathi
तुम मेरी किताबो की तरह हो,
तुम मेरी किताबो की तरह हो,
Vishal babu (vishu)
आत्म बोध
आत्म बोध
DR ARUN KUMAR SHASTRI
प्यार है रब की इनायत या इबादत क्या है।
प्यार है रब की इनायत या इबादत क्या है।
सत्य कुमार प्रेमी
प्रेम का दरबार
प्रेम का दरबार
Dr.Priya Soni Khare
डाल-डाल तुम हो कर आओ
डाल-डाल तुम हो कर आओ
नन्दलाल सिंह 'कांतिपति'
यादों के झरने
यादों के झरने
Sidhartha Mishra
दूर रह कर सीखा, नजदीकियां क्या है।
दूर रह कर सीखा, नजदीकियां क्या है।
Surinder blackpen
पहचान तेरी क्या है
पहचान तेरी क्या है
Dr fauzia Naseem shad
पत्तों से जाकर कोई पूंछे दर्द बिछड़ने का।
पत्तों से जाकर कोई पूंछे दर्द बिछड़ने का।
Taj Mohammad
Kabhi kabhi
Kabhi kabhi
Vandana maurya
*जनता के कब पास है, दो हजार का नोट* *(कुंडलिया)*
*जनता के कब पास है, दो हजार का नोट* *(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
बगावत का आगाज़
बगावत का आगाज़
Shekhar Chandra Mitra
उनसे  बिछड़ कर
उनसे बिछड़ कर
श्याम सिंह बिष्ट
💐प्रेम कौतुक-453💐
💐प्रेम कौतुक-453💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
"नशा इन्तजार का"
Dr. Kishan tandon kranti
क्या हुआ , क्या हो रहा है और क्या होगा
क्या हुआ , क्या हो रहा है और क्या होगा
कृष्ण मलिक अम्बाला
स्थायित्व (Stability)
स्थायित्व (Stability)
Shyam Pandey
बुद्ध पुर्णिमा
बुद्ध पुर्णिमा
Satish Srijan
अपना समझकर ही गहरे ज़ख्म दिखाये थे
अपना समझकर ही गहरे ज़ख्म दिखाये थे
'अशांत' शेखर
'व्यथित मानवता'
'व्यथित मानवता'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
दोहा- बाबूजी (पिताजी)
दोहा- बाबूजी (पिताजी)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
गज़ल
गज़ल
Mahendra Narayan
जिस्म तो बस एक जरिया है, प्यार दो रूहों की कहानी।
जिस्म तो बस एक जरिया है, प्यार दो रूहों की कहानी।
Manisha Manjari
Loading...