Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Aug 2023 · 1 min read

किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?

एक गीत
_________________________________________
कुण्डली को देख कर ही पण्डितों ने था मिलाया,
किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?

गण मिले नाड़ी मिली थी
वर्ण भी अनुकूल ही थे,
वेद मंत्रों से हुआ
संबंध का आरंभ सुखकर।
वश्य राशि: लग्न तारा,
योग भी शुभकर सभी कुछ,
और उनसे था मिला
प्रारंभ का परिरंभ सुखकर।

रीति- रश्मों को निभाने में नहीं कोई कमी थी,
कौन सा वह योग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?

अष्टकूटों के गुणन में
गुण मिला सुंदर शुभग जो,
प्रेम के माधुर्य का
होता यही आधार अनुपम।
किन्तु कुछ दिन ही गये
क्यों लुप्त सा वह प्रेम पावन,
प्रीत के पर्याय में है
दृष्टिगत तकरार अनुपम।

चल रहे हैं पंथ एकल पर अनागत दिग्भ्रमित है,
कौन सा वह रोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?

पंचदेवों को निमंत्रण
तीर्थ जल से घट प्रतिष्ठित,
वेद की अनगिन ऋचाओं
से बना संबंध अद्भुत।
यज्ञ की समिधा रही है
साक्ष्य परिणय की हमारे,
और सुचि उस यज्ञशाला
में बँधा यह बंध अद्भुत।

सङ्ग रहकर भी अभी तक हम बटोही हैं अपरिचित,
कौन सा दुर्योग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?

कुण्डली को देख कर ही पण्डितों ने था मिलाया,
किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?

✍️ संजीव शुक्ल ‘सचिन’ (नादान)

Language: Hindi
Tag: गीत
1 Like · 132 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from संजीव शुक्ल 'सचिन'
View all
You may also like:
लला गृह की ओर चले, आयी सुहानी भोर।
लला गृह की ओर चले, आयी सुहानी भोर।
डॉ.सीमा अग्रवाल
Kagaj ki nav ban gyi mai
Kagaj ki nav ban gyi mai
Sakshi Tripathi
आज  मेरा कल तेरा है
आज मेरा कल तेरा है
Harminder Kaur
रपटा घाट मंडला
रपटा घाट मंडला
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
Meditation
Meditation
Ravikesh Jha
हे महादेव
हे महादेव
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
लव यू इंडिया
लव यू इंडिया
Kanchan Khanna
कहीं वैराग का नशा है, तो कहीं मन को मिलती सजा है,
कहीं वैराग का नशा है, तो कहीं मन को मिलती सजा है,
Manisha Manjari
रूठ जा..... ये हक है तेरा
रूठ जा..... ये हक है तेरा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
(17) यह शब्दों का अनन्त, असीम महासागर !
(17) यह शब्दों का अनन्त, असीम महासागर !
Kishore Nigam
💐प्रेम कौतुक-327💐
💐प्रेम कौतुक-327💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
प्यासा के कुंडलियां (झूठा)
प्यासा के कुंडलियां (झूठा)
Vijay kumar Pandey
3230.*पूर्णिका*
3230.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
#ekabodhbalak
#ekabodhbalak
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बुद्धिमान हर बात पर,
बुद्धिमान हर बात पर,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
" फ़साने हमारे "
Aarti sirsat
हर शय¹ की अहमियत होती है अपनी-अपनी जगह
हर शय¹ की अहमियत होती है अपनी-अपनी जगह
_सुलेखा.
शुभम दुष्यंत राणा shubham dushyant rana ने हितग्राही कार्ड अभियान के तहत शासन की योजनाओं को लेकर जनता से ली राय
शुभम दुष्यंत राणा shubham dushyant rana ने हितग्राही कार्ड अभियान के तहत शासन की योजनाओं को लेकर जनता से ली राय
Bramhastra sahityapedia
झुर्री-झुर्री पर लिखा,
झुर्री-झुर्री पर लिखा,
sushil sarna
जाने क्यूँ उसको सोचकर -
जाने क्यूँ उसको सोचकर -"गुप्तरत्न" भावनाओं के समन्दर में एहसास जो दिल को छु जाएँ
गुप्तरत्न
कैदी
कैदी
Tarkeshwari 'sudhi'
जिगर धरती का रखना
जिगर धरती का रखना
Kshma Urmila
*जहाँ बस भाईचारा हो 【मुक्तक 】*
*जहाँ बस भाईचारा हो 【मुक्तक 】*
Ravi Prakash
संबंध क्या
संबंध क्या
Shweta Soni
रण प्रतापी
रण प्रतापी
Lokesh Singh
घर को छोड़कर जब परिंदे उड़ जाते हैं,
घर को छोड़कर जब परिंदे उड़ जाते हैं,
शेखर सिंह
"कुण्डलिया"
surenderpal vaidya
यह कौन सी तहजीब है, है कौन सी अदा
यह कौन सी तहजीब है, है कौन सी अदा
VINOD CHAUHAN
#मुक्तक-
#मुक्तक-
*Author प्रणय प्रभात*
टूटे बहुत है हम
टूटे बहुत है हम
The_dk_poetry
Loading...