Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Dec 2023 · 1 min read

काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं

काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं
जीवित रहते हाल न पूंछा, तस्वीरों पर हार चढ़ाते हैं
मात – पिता को पानी न देते, भंडारे करवाते है
हक़ मारते भाई, बहन का, दानवीर कहलाते है
काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं

कितने त्याग हैं मात पिता के ,कभी नहीं दर्शाते हैं
अपनी क्षुधा सहन लेते , बच्चों को खिलाते हैं
निद्रा पूर्ति हेतु बच्चों की,अपनी रातें गँवाते हैं
आवश्यक हो जावे तो,कर्जा भी ले आते हैं
काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं

सभी संतानों को वो पालते, कभी नहीं घबराते है
मात पिता हमसे ना पलते, वो दुत्कारे जाते हैं
कुत्तों को घर में रखते हैं, आधुनिक बन जाते हैं
काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं

190 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
शून्य से अनन्त
शून्य से अनन्त
The_dk_poetry
नयकी दुलहिन
नयकी दुलहिन
आनन्द मिश्र
दादा का लगाया नींबू पेड़ / Musafir Baitha
दादा का लगाया नींबू पेड़ / Musafir Baitha
Dr MusafiR BaithA
तकते थे हम चांद सितारे
तकते थे हम चांद सितारे
Suryakant Dwivedi
अरे मुंतशिर ! तेरा वजूद तो है ,
अरे मुंतशिर ! तेरा वजूद तो है ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
आज तक इस धरती पर ऐसा कोई आदमी नहीं हुआ , जिसकी उसके समकालीन
आज तक इस धरती पर ऐसा कोई आदमी नहीं हुआ , जिसकी उसके समकालीन
Raju Gajbhiye
भाषा और बोली में वहीं अंतर है जितना कि समन्दर और तालाब में ह
भाषा और बोली में वहीं अंतर है जितना कि समन्दर और तालाब में ह
Rj Anand Prajapati
घे वेध भविष्याचा ,
घे वेध भविष्याचा ,
Mr.Aksharjeet
चन्द्रयान पहुँचा वहाँ,
चन्द्रयान पहुँचा वहाँ,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
पल पल का अस्तित्व
पल पल का अस्तित्व
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
वफ़ा
वफ़ा
shabina. Naaz
2489.पूर्णिका
2489.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
वर्ल्डकप-2023 सुर्खियां
वर्ल्डकप-2023 सुर्खियां
दुष्यन्त 'बाबा'
चाटुकारिता
चाटुकारिता
Radha shukla
*डुबकी में निष्णात, लौट आता ज्यों बिस्कुट(कुंडलिया)*
*डुबकी में निष्णात, लौट आता ज्यों बिस्कुट(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
सत्य, अहिंसा, त्याग, तप, दान, दया की खान।
सत्य, अहिंसा, त्याग, तप, दान, दया की खान।
जगदीश शर्मा सहज
पढ़ाकू
पढ़ाकू
Dr. Mulla Adam Ali
जिस बस्ती मेंआग लगी है
जिस बस्ती मेंआग लगी है
Mahendra Narayan
संकल्प
संकल्प
Naushaba Suriya
हमें ना शिकायत है आप सभी से,
हमें ना शिकायत है आप सभी से,
Dr. Man Mohan Krishna
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा
Shyam Sundar Subramanian
#आंखों_की_भाषा
#आंखों_की_भाषा
*Author प्रणय प्रभात*
Shabdo ko adhro par rakh ke dekh
Shabdo ko adhro par rakh ke dekh
Sakshi Tripathi
ऐ ज़िन्दगी ..
ऐ ज़िन्दगी ..
Dr. Seema Varma
Second Chance
Second Chance
Pooja Singh
खेल और राजनीती
खेल और राजनीती
'अशांत' शेखर
"गलतफहमी"
Dr. Kishan tandon kranti
खुद ही परेशान हूँ मैं, अपने हाल-ऐ-मज़बूरी से
खुद ही परेशान हूँ मैं, अपने हाल-ऐ-मज़बूरी से
डी. के. निवातिया
जब तुमने सहर्ष स्वीकारा है!
जब तुमने सहर्ष स्वीकारा है!
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
ग़ज़ल
ग़ज़ल
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
Loading...