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9 Aug 2023 · 1 min read

क़लम, आंसू, और मेरी रुह

क़लम, आंसू, और मेरी रुह
सब गुलाम तेरी हों गयीं
ऎसा महसूस होता हैं कि
मुझमें मुकम्मल कुछ बचा ही नहीं

✍️ The_dk_poetry

1 Like · 225 Views
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