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1 Apr 2018 · 10 min read

🚩🚩 रचनाकार का परिचय/”पं बृजेश कुमार नायक” का परिचय

🦜(1) पारिवारिक, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक परिचय
===================================

🧿(1)
नमन ‘बृजेश कुमार’ का, गुरुवर हो स्वीकार ।
‘नायक’ शुभ उपनाम प्रभु, तुम सद्ज्ञानाधार ।।
तुम सद्ज्ञानाधार 1️⃣’एम.ए.’डिग्री धारक
बना,ग्रहण कर ज्ञान, बोध बिन जग,दुख कारक।
‘नायक’ मिली उपाधि, और2️⃣’साहित्यरत्न’ गुन
सह 3️⃣’अभियंत्रण-ज्ञान’, सफलता हेतु पुनि नमन ।।

💅शब्दार्थ/विवरण

1️⃣ ‘एम.ए.’ डिग्री= हिंदी विषय के साथ
Master of art /कला-निष्णात की उपाधि।

2️⃣’साहित्यरत्न’ गुन=हिंदी विषय के साथ “साहित्यरत्न” की उपाधि प्राप्त करने के लिए की गई पढ़ाई से प्राप्त ज्ञान।

3️⃣’अभियंत्रण-ज्ञान’= आटोमोबाइल इंजीनियरिंग से त्रिवर्षीय पालीटेकनिक डिप्लोमा परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए की गई पढ़ाई से प्राप्त ज्ञान एवं प्रशिक्षु काल का ज्ञान।

🧿(2)
सहज कहूॅ 4️⃣मम् जन्म-भू, प्रियअतिशय सुख-धाम।
स्थित है,उरई-निकट,शुभ “कैथेरी” ग्राम।।
शुभ “कैथेरी” ग्राम, जिला-जालौन हमारा।
“उत्तर प्रदेश” राज्य,औ “भारत” देश प्यारा।।
‘नायक’ सुनों सुजान, स्वयं अपने अवगुण तज
नित्य करो प्रभु-ध्यान, गले मद तभी तुम सहज।।

💅शब्दार्थ

4️⃣मम्=मेरी

🧿(3)
माता औ पितु-चरण में,मेरा सारा ज्ञान ।
जिन सद्कृपा-फुहार से, मिली सूक्ष्म पहचान ।
मिली सूक्ष्म पहचान, ज्ञानमय शुभाशीष गह
वह अति तीक्ष्ण सप्रेम, विज्ञतामय चेतन अह ।।
‘नायक’ सुनो सुजान, प्रीतिमय योग सुप्रात:।
स्वर्गवास हो गया, हृदय में हैं श्री माता ।।

🧿(4)
माता मेरी मूरती, पिता श्री रामस्वरूप ।
“आठ मई” शुभ जन्मतिथि, गुरुवर लिखी अनूप ।।
गुरुवर लिखी अनूप, सन् “उन्नीस सौ इकसठ” ।
जीवन बने प्रकाश, पकड़ ‌‌ज्ञानी-मग झट-पट।
‘नायक’ शिक्षा हेतु ,पाठशाला नित जाता ।
मिली बोधमय दीप्ति ,हर्षमय पितु औ माता ।।

🧿(5)
सज-धज कर हम चल दिए,ग्राम 5️⃣कनासी-ओर ।
इक्यासी सन् में हुए, दोनों ही चित-चोर ।।
दोनो ही चित-चोर, शिव कुमारी-सी जाया ।
पाकर हुआ प्रसन्न, साधुता की वह माया ।।
‘नायक’ आज सहर्ष, मातु-पितु मन बनकर ध्वज।
देख,उढा हे ईश, बहू आई है सज-धज ।।

💅विवरण

5️⃣कनासी=
ग्राम व पोस्ट-कनासी,तहसील-कोंच,
विकास खंड-नदीगांव,जिला-जालौन,
उ प्र,भारतवर्ष।

🧿(6)
कैथेरी तज, 6️⃣कोंच में, दारा- गृह-दिक्पाल
से आच्छादित मायका ,में मेरी ससुराल ।।
में मेरी ससुराल, बना, शुभ-सुंदर लघु-घर ।
मैं सह भार्या-वास,यही है क्रौंच-ऋषि-नगर ।।
‘नायक’ सुनो सुजान, हर्षमय जाया मेरी ।
देख समय की चाल, त्याग दी प्रिय 7️⃣कैथेरी ।।

💅विवरण

6️⃣कोंच=
सुभाष नगर, कोंच
जिला-जालौन,उ प्र,
भारतवर्ष
पिनकोड-285205
“केदारनाथ दूरवार स्कूल के पास”

7️⃣ कैथेरी =
ग्राम -कैथेरी,
पोस्ट -बड़ागांव(उरई),
तहसील -उरई,
जिला -जालौन,
उ प्र,भारतवर्ष।

🧿(7)
बन गये हैं 8️⃣अधिकारी ,बेटा पवन कुमार ।
भारतवर्ष महान हित ,नौसेना का सार ।।
नौसेना का सार, ग्रहण कर नूतन जीवन ।
बन गए अमल विकास, राष्ट्रहित की संजीवन ।।
‘नायक’ सचमुच आप, देश-रक्षारूपी जन ।
गुणी-दक्ष यश- खान, जीवनी हित पोषक बन ।।

💅विवरण

8️⃣अधिकारी=”लेफ्टीनेंट कमांडर” इंडियन नेवी

🧿(8)
“जीवन जीने की कला “,सीखी सद्गुरू -धाम ।
9️⃣”टीचर” बना सुबोध गह, हृदय बना सुख-धाम ।।
हृदय बना सुख-धाम, मिल गया दिव्य ज्ञान -कण ।
करी साधना नित्य, घना हो गया ध्यान -धन ।।
‘नायक’ अमल अकाश, प्रेम की शुभ काशी बन ।
गह सद्ज्ञानालोक,मुस्कराहटमय जीवन ।।

💅विवरण

9️⃣”टीचर”=
पूर्णकालिक टीचर
ए ओ एल पार्ट-1कोर्स
(हैप्पीनेस कोर्स)
द आर्ट आफ लिविंग
(विश्व प्रसिद्ध योगी सद्गुरु श्री श्री रविशंकर जी की एक अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्था, जिसका अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय “बंगलौर” भारतवर्ष में स्थित है।)

🧿(9)
श्री रविशंकर सद्गुरू, प्रेम सहित प्रभुध्यान।
बाल चपलता कृष्णमय, सदा खींचती ध्यान।।
सदा खींचती ध्यान दिव्य आनंद-प्रदाता।
योगमयी सद्भूप, सदा ही हैं बिन 🔟आपा।।
‘नायक’ सुनो सुजान, ज्ञानमय सागर श्री जी।
ध्यानमग्न ऋषिरुप कहें हम उनको श्री श्री।।

💅शब्दार्थ
🔟आपा=अहंकार

🧿(10)
शादी पवन कुमार की, हुई स्वाति के संग ।
पुत्रवधू घर आ गई, बनकर पावन गंग ।।
बनकर पावन गंग, दो हजार सत्तरह सन्
माह दिसम्बर जान, प्रफुल्लित हम सबका मन।
‘नायक’ सुनों सुजान,पढ़ें पंडित शुभ-आदी ।
पवन संग हो गयी, स्वाति की पावन शादी ।

🧿(11)
“विद्यासागर” बन गया , गह साहित्यिक मान।
“क्रौंच सु ऋषि आलोक” कृति, पर यह प्रिय सम्मान।।
पर यह प्रिय सम्मान,1️⃣1️⃣”पीठ” को नमन हमारा।
शोधपरक शुभ ग्रंथ, करेगा शुभ उजियारा।।
‘नायक’ सुनों सुजान, दिव्यतामय गुण आगर
ग्रन्थ-ज्ञान-आलोक, जानिए “विद्यासागर”।।

💅विवरण

1️⃣1️⃣”पीठ”=
”बिक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ” ईशीपुर,बिहार, भारत
तत्कालीन कुलाधिपति- संत श्री डा.सुमन भाई
“मानस-भूषण”

🧿(12)
झाॅसी आया मैं स्वयं, ज्येष्ठ पुत्र के संग।
“सनफ्रान अशोक सिटी” में “डी ब्लाक” सु 1️⃣2️⃣छंग।
में “डी ब्लाक” सु छंग, विला “पचहत्तर नम्बर”
क्रय कीन्हाॅ सुत पवन, दिल छुआ हर्षित अम्बर।।
‘नायक’ सुनों सुजान, क्रौंच -ऋषि की शुभ काशी
कोंच से आया मैं, भा गई मुझको झाॅसी।।

💅शब्दार्थ

1️⃣2️⃣छंग=उत्संग(आलिंगन,मिलाप,संग,अटारी,गोद)

🧿(13)
शादी लघु सुत की हुई, सन् २२ में और
सफल माह अप्रैल था, रवि सिर सज्जित मौर।
रवि सिर सज्जित मौर, पतोहू घर पर आई।
घर में सब आनंद, सभी गा रहीं बधाई।
कह ‘नायक’ कुछ लोग, बाॅटने लगे प्रसादी।
रवि प्रकाश के संग, हो गई रितु की शादी।।

🧿(14)
बोधी गुरु1️⃣3️⃣आश्रम-सुपथ1️⃣4️⃣अनुभवऔ प्रभु-ध्यान
किया, ज्ञान आने लगा,गलने लगा गुमान।।
गलने लगा गुमान आत्म-सत् हुआ सवाया।
प्रेम और आनंद, ईश ने आ वर्षाया।।
‘नायक’ बनो न आप, स्वयं ही आत्म-विरोधी।
दिव्य गुरू-आलोक ग्रहण कर बनिए बोधी।।

💅विवरण
1️⃣3️⃣ आश्रम-सु पथ=विश्व प्रसिद्ध योगी, ऋषिवर एवं अंतर्राष्ट्रीय आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक,सद्गुरू श्री श्री रविशंकर जी के बंगलौर आश्रम से “टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स” (TTC) करने के बाद AOL पार्ट 1 कोर्स (वर्तमान समय में हैप्पीनेश कोर्स) के पूर्णकालिक टीचर के रूप में कार्य करने के साथ एवं इसके पूर्व बेसिक/पार्ट 1 कोर्स करने के बाद दीर्घ काल तक की गई सेवा,साधना एवं अन्य कई कोर्सों के करने के प्रतिफल के रूप में प्राप्त आध्यात्मिक अनुभव/ज्ञान का सुंदर पथ।

1️⃣ 4️⃣अनुभव= लम्बे समय तक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया।नेहरू युवा केंद्र संगठन उ प्र भारत सरकार द्वारा संचालित ‘युवा लक्ष्य 2000 सबको शिक्षा सबको स्वास्थ्य’ परियोजना में ‘ए पी ओ’ एवं ‘राज्य प्रशिक्षक सह प्रवर्तक’ पदों पर कार्य कर कार्यानुभव प्राप्त किया। ‘युवा विकास संस्थान’ ग्राम कैथेरी के प्रतिनिधि के रुप में श्री चंद्रशेखर प्राण ‘राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक’ ‘नेहरू युवा केंद्र संगठन’ भारत सरकार के नेतृत्व में चल रही ‘पंचपरमेश्वर साइकिल यात्रा’ में सहभागी बना। ‘पंचपरमेश्वर साइकिल यात्रा’ के दौरान हरियाणा में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के प्रतिनिधि एवं आई ए एस श्री सुनील गुलाटी से हुई वार्ता के अनुसार ‘पंचपरमेश्वर साइकिल यात्रा’ सम्पन्न होने के बाद सद्गुरू श्री श्री रविशंकर जी की उपस्थिति में ऋषिकेश में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ का कोर्स किया एवं विवरण 13 के अनुसार “आश्रम-सु पथ” पर चलकर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। रिक्त समय में दिव्य समाज निर्माण अभियान समिति पंजीकृत के प्रबंधक के रूप में कार्य किया।वर्ष 2013 में मेरी प्रथम कृति ‘जागा हिन्दुस्तान चाहिए’ के प्रकाशित होने के बाद साहित्य जगत् में प्रवेश किया।

✓ वर्ष 2013 और उसके बाद की जानकारी के लिए रचनाकार के इस परिचय में दिए गए “साहित्यिक अवदान” का अवलोकन किया जा सकता है।

🧿(15)
झाॅसी में 1️⃣5️⃣घर खरीदा,आनंदित हर श्वास।
कार्य चल रहा इसलिए, 1️⃣6️⃣पवन-सु गृह में वास।।
पवन सु गृह में वास, किया तो दिल खुश मेरा।
मन को कर लो शांत, बनो सद्ज्ञान सवेरा।।
‘नायक’ सुनो सुजान,त्याग जग-भ्रम की खाॅसी
प्राप्त करो आनंद, दिव्यतामय है झाॅसी।।

💅विवरण

1️⃣5️⃣ घर खरीदा=

विला संख्या
G 122
सनफ्रान अशोक वैली,
झाँसी,उत्तर प्रदेश, भारतवर्ष।
पिनकोड-284128
“मुस्तरा रेलवे स्टेशन के पास”

को क्रय किया।

1️⃣6️⃣ पवन-सु गृह=
ज्येष्ठ पुत्र पवन कुमार नायक का सनफ्रान अशोक सिटी, झाॅसी में विला डी 75 के रूप में बना हुआ “सुन्दर घर”।

🧿(16)
“सरजू दीक्षित” ससुर जी, 1️⃣7️⃣मम् भार्या के पितृ,
मानवता के पुजारी, का था दिव्य चरित्र।।
का था दिव्य चरित्र शोक वह स्वर्ग पधारे।
सास “राममूर्ति” के, वह भरतार थे प्यारे।।
‘नायक’ अब भी दुःख, दिलों में है परिलक्षित।
परिजन सभी उदास, नहीं अब 1️⃣8️⃣”सरजू दीक्षित”।।

💅 शब्दार्थ
1️⃣7️⃣मम् भार्या के पितृ=मेरी पत्नी के पिता

💅विवरण
1️⃣8️⃣ “सरजू दीक्षित”= श्री सरजू प्रसाद दीक्षित “लोकतंत्र रक्षक सैनानी” सुभाष नगर,कोंच,जिला-जालौन, उत्तर प्रदेश, भारतवर्ष।

🦜(२)साहित्यिक अवदान
=================

🧿(अ) प्रकाशित कृतियाॅ

📚(A)”जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह

👉’जागा हिंदुस्तान चाहिए’ राष्ट्र प्रेम/जागरण की रचनाएं एवं तीखे व्यंगों से युक्त काव्य संग्रह है।
👉इस काव्य संग्रह के लिए कृति के रचनाकार पं बृजेश कुमार नायक का बिक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा ‘विद्यावाचस्पति’ सारस्वत सम्मान से अलंकरण हो चुका है।

📚(B)”क्रौंच सु ऋषि आलोक” खंडकाव्य/शोधपरक ग्रंथ

👉 उक्त कृति के नाम ‘क्रौंच सु ऋषि आलोक’ का अर्थ है “क्रौंच नाम के श्रेष्ठ ऋषि का दर्शन (यथार्थ तत्व ज्ञान)”
👉”क्रौंच ऋषि” का जन्म ईसवी सन् के पूर्व हुआ था।
👉 इस कृति का मुख्य आकर्षण “प्रभु श्री राम का चेतनालोक” है।
👉 ‘क्रौंच सु ऋषि आलोक’ आध्यात्मिक कृति/खण्ड काव्य/शोधपरक ग्रंथ के लिए कृति के रचयिता पं बृजेश कुमार नायक को बिक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा ‘विद्यासागर’ सारस्वत सम्मान से विभूषित किया जा चुका है।

📚(C)”पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” काव्य संग्रह

👉 यह श्रृंगार की चर्चित रचना एवं श्री कृष्ण उवाच “प्रकृति” से युक्त काव्य संग्रह है।
👉 उक्त गीत “प्रकृति” का काव्य पाठ ‘काव्य सुमन’ कार्यक्रम में, उक्त कृति के रचनाकार बृजेश कुमार नायक की आवाज में आकाशवाणी छतरपुर से प्रसारित हो चुका है।
👉 उक्त कृति के कृतिकार पं बृजेश कुमार नायक “प्रेमसागर” सम्मान से सुशोभित है
👉इस काव्य संग्रह में गरीबों के प्रति संवेदना, श्रृंगार,हास्य एवं राष्ट्र प्रेम की रचनाएं हैं।

✓उक्त तीनों कृतियों के द्वितीय संस्करण साहित्यपीडिया पब्लिशिंग नोयडा, भारत से प्रकाशित हैं और अमेजन-फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं।

🧿(ब) सम्मान एवं उपाधियाॅ

🎓(1)बिक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ ईशीपुर, बिहार, भारत द्वारा “क्रौंच सु ऋषि आलोक” खंड काव्य/शोधपरक ग्रंथ के लिए “विद्यासागर” एवं “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के लिए “विद्यावाचस्पति” ,जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली द्वारा उत्कृष्ट श्रृंगार काव्य-लेखन के लिए प्रेम-सागर “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के लिए “साहित्य गौरव”, विश्व हिंदी रचनाकार मंच द्वारा उत्कृष्ट
हिंदी रचना के लेखन के लिए “हिंदी-सागर”, शाहिद कलासम्मान परिषद द्वारा “जालौन रत्न” एवं उक्त संस्थाओं के अतिरिक्त कई अन्य संस्थाओं द्वारा भी अब तक उक्त विद्यासागर,विद्यावाचस्पति,हिंदी-सागर,प्रेम-सागर और साहित्य गौरव सहित कुल 15 से अधिक उपाधियों/सारस्वत सम्मानों/सम्मानों आदि से अलंकृत किया जा चुका है।

🎓(2) वर्ष 2021 में प्रकाशित “महाप्रज्ञ” ग्रंथ में पेज 127 पर प्रकाशित कविता “महाप्रज्ञ गुणवान” के लिए “BRITISH WORLD RECORDS” LONDON UK द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र एवं साहित्यपीडिया पब्लिशिंग नोयडा,भारत द्वारा 1️⃣9️⃣”मां, हर बचपन का भगवान” कविता की श्रेष्ठता के आधार पर 2018 में दिया गया “प्रशस्ति पत्र’ के अतिरिक्त आधा दर्जन से अधिक अन्य संस्थाओं ने भी रचनाकार पं बृजेश कुमार नायक को प्रशंसा पत्रों/सम्मान पत्रों/प्रशस्ति पत्रों आदि से सुशोभित किया है।

✓विवरण

1️⃣9️⃣”माॅ,हर बचपन का भगवान”=
“माॅ, हर बचपन का भगवान” रचना “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के द्वितीय संस्करण में पृष्ठ संख्या 89 पर पढ़ी जा सकती है। “जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति/काव्य संग्रह का द्वितीय संस्करण साहित्यपीडिया पब्लिशिंग, नोएडा, भारत से प्रकाशित है और अमेजन-फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

🎓(3)”राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद” नई दिल्ली के “भाषा शिक्षा विभाग” की तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रोफेसर माननीय सु श्री चंद्रा सदायत द्वारा “भाषा शिक्षा विभाग” की ओर से लिखा गया “रचनाकार के उज्जवल भविष्य की आश्वस्ति” सम्बंधी पत्र दिनांक 09/07/2014 ने भी “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह की शोभा बढाई है।

उक्त पत्र “साहित्यपीडिया पब्लिशिंग” नोएडा, भारत से प्रकाशित एवं “बिक्रम शिला हिंदी विद्मापीठ” ईशीपुर, बिहार द्वारा वर्ष 2018 में “विद्यावाचस्पति” से विभूषित कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के द्वितीय संस्करण में पढ़ा जा सकता है।

🎓(४)”क्रौच सुऋषि आलोक” का मैंने संगोपांग अध्ययन किया और पाया कि श्री बृजेश कुमार नायक ने इस कृति में जो बिंदु उठाए हैं वे अद्वितीय हैं।इस खंड काव्य के अध्ययन से ऐसी गंभीर जानकारियों से अवगत होने का अवसर मिला जो अभी तक मेरे ज्ञान से बहुत दूर थीं और सामान्य पाठकों को भी दुर्लभ ।इस शोधपरक ग्रंथ के लेखन मे़ श्री नायक के कुशाग्र मानस का कौसल स्पष्ट परिलक्षित हुआ है। उनका अध्ययन-मनन और चिंतन यह दर्शाता है कि ये एक लगनशील चिंतक और गंभीर लेखन के धनी हैं।
डा मोहन तिवारी आनंद
अध्यक्ष
म प्र तुलसी साहित्य अकादमी, भोपाल

✓उक्त विचार डा मोहन तिवारी आनंद, अध्यक्ष “म प्र तुलसी साहित्य अकादमी” भोपाल द्वारा लिखी गयी कवि बृजेश कुमार नायक की कृति”क्रौंच सु ऋषि आलोक” खंड काव्य की “समीक्षा” ,जो म प्र तुलसी साहित्य अकादमी की पत्रिका कर्मनिष्ठा मई 2017में प्रकाशित है ,से साभार लिए गये हैं।

🎓(५) डा अन्नपूर्णा भदौरिया, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग ,जीवाजी विश्वविद्यालय,ग्वालियर,म प्र द्वारा 2013 में लिखी गयी रचनाकार बृजेश कुमार नायक की कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” की “भूमिका” में “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के रचनाकार “बृजेश कुमार नायक” को “भाव कवि” के रुप में प्रतिष्ठित किया गया है।

कवि बृजेश कुमार नायक की कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह की डा अन्नपूर्णा भदौरिया द्वारा लिखी गयी “भूमिका” को “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के प्रथम एवं द्वितीय दोंनों संस्करणों में पढ़ा जा सकता है।

✓”जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह का द्वितीय संस्करण “साहित्यपीडिया पब्लिशिंग” नोएडा, भारत से प्रकाशित है और अमेजन-फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

🎓साहित्यपीडिया पब्लिशिंग ने रचनाकार की कृतियों में कृतिकार के नाम के पूर्व सम्मान सूचक शब्द पं(पंडित) लगाकर कृतिकार ‘बृजेश कुमार नायक’ को ‘पं बृजेश कुमार नायक’ के रूप में प्रतिष्ठित किया ।

📢(स)प्रसारण

📻आकाशवाणी छतरपुर से “काव्य-सुमन कार्यक्रम”में अनेक काव्यपाठ प्रसारित हो चुके हैं।

🦜(३)सम्पर्क सूत्र
============

(1)

🛖वर्तमान निवास

D 75
सनफ्रान अशोक सिटी,
झाॅसी,उ प्र,
भारतवर्ष
पिनकोड-284128
मोबाइल-9956928367
“कानपुर ग्वालियर बाई पास पर”

✓विवरण हेतु
कुंडलिया संख्या 12 का अवलोकन करें।

(2)
🛖ससुराल

सुभाष नगर,कोंच
जिला-जालौन,
उ. प्र.,भारतवर्ष।
पिनकोड -285205
“केदारनाथ दूरवार स्कूल के पास”

✓विवरण हेतु
कुंडलिया संख्या 6 का अवलोकन करें।

(3)
🛖कार्यालय

G 122
सनफ्रान अशोक वैली, झाॅसी
उत्तर प्रदेश, भारतवर्ष।
पिनकोड -284128
“मुस्तरा रेलवे स्टेशन के पास”

✓विवरण
उक्त डुप्लेक्स विला ‘G122 SAV Jhs’ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। शीघ्र पजेशन मिलने की संभावना है।
✓अन्य विवरण हेतु कुंडलिया संख्या 15 का अवलोकन किया जा सकता है।

(4)
💐’नायक जी का बाड़ा’
H 36
सनफ्रान अशोक सिटी, झांसी
उत्तर प्रदेश, भारतवर्ष।
पिनकोड 284128
“कानपुर ग्वालियर बाय पास”
******************************************

👉 वर्ष 2013 में जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली से प्रकाशित “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह, वर्ष 2016 में जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली से प्रकाशित “क्रौंच सुऋषि आलोक” खंड काव्य के प्रथम संस्करणों के अंतिम पृष्ठों में कुंडलिया छंदों में अंकित उक्त कृतियों के रचनाकार पं बृजेश कुमार नायक के “परिचय” को कुछ सुधार के बाद वर्ष 2018 में साहित्यपीडिया पब्लिशिंग नोएडा, भारतवर्ष से प्रकाशित कृति “पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” के प्रथम संस्करण और 2018 में साहित्यपीडिया पब्लिशिंग नोएडा,भारतवर्ष से प्रकाशित “क्रौंच सु ऋषि आलोक” खंड काव्य/शोधपरक ग्रंथ के द्वितीय संस्करण के अंतिम पृष्ठों में प्रकाशित किया गया था। बाद में वर्तमान समय के अनुसार रचनाकार “पं बृजेश कुमार नायक” के उक्त परिचय” को वर्ष 2023 में पुनः परिष्कृत किया गया।

👉 पं बृजेश कुमार नायक की उक्त तीनों कृतियों वर्ष 2013 में “जे एम डी पब्लिकेशन” नई दिल्ली से प्रकाशित “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह और वर्ष 2016 में “जे एम डी पब्लिकेशन” नई दिल्ली से प्रकाशित “क्रौंच सु ऋषि आलोक” खंड काव्य/शोधपरक ग्रंथ एवं 2018 में साहित्यपीडिया पब्लिशिंग नोयडा, भारत से प्रकाशित “पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” के द्वितीय संस्करण क्रमश: “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह का द्वितीय संस्करण वर्ष 2020 में , “क्रौंच सु ऋषि आलोक” खंडकाव्य/शोधपरक ग्रंथ का द्वितीय संस्करण वर्ष 2018 में एवं “पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” कृति का द्वितीय संस्करण “काव्य संग्रह” के रुप में वर्ष 2021 में नए कवर और नए आई एस बी एन के साथ “साहित्यपीडिया पब्लिशिंग” नोयडा,भारत (Sahityapedia publishing Noida, India) से प्रकाशित हैं और अमेजन-फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं।

🙏🙏
ॐ नमः शिवाय

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कविता
कविता
Rambali Mishra
असंवेदनशीलता
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Shyam Sundar Subramanian
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