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5 Apr 2024 · 1 min read

कल आज और कल

कल आज और कल
कल थे पिताजी आज के पापा कल के लिए है डैड ।
कल थी खटिया आज है पलका चलन में डबल बेड ।।
समय का झरना झरता रहता कल आज और कल में।
कल दादाजी आज पिताजी है कल घर में बेटा हेड ।।
– ओमप्रकाश भार्गव , पिपरिया

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