Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings

कली बुझी बुझी हुई गुलों में ताज़गी नहीं

कली बुझी बुझी हुई गुलों में ताज़गी नहीं
सभी बहुत उदास हैं नसीब में ख़ुशी नहीं

बहार वादियों से छीन ले गई है ख़ुश्बुएं
चमन परस्त बागवाँ की नींद पर खुली नहीं

हमें भी देख एक दिन तो सरहदों पे भेज कर
उबल रहा लहू जिगर में आग़ कम लगी नहीं

जो कर सका पलट के पत्थरों से वार कर गया
निगाह खोजबीन की उधर कभी उठी नहीं

हजार बार बात ये कही गई सुनी गई
महज हो एक वोट तुम कहीं से आदमी नहीं

तुम्हें यकीन ही कहाँ मेरे किसी सबूत पर
उसी पे मर मिटे किसी का जो हुआ कभी नहीं

राकेश दुबे “गुलशन”
15/07/2016
बरेली

1 Comment · 240 Views
You may also like:
साधु न भूखा जाय
श्री रमण 'श्रीपद्'
कैसे मैं याद करूं
Anamika Singh
मां की महानता
Satpallm1978 Chauhan
जुद़ा किनारे हो गये
शेख़ जाफ़र खान
दीवार में दरार
VINOD KUMAR CHAUHAN
मुझको कबतक रोकोगे
Abhishek Pandey Abhi
पिता की व्यथा
मनोज कर्ण
अनमोल जीवन
आकाश महेशपुरी
पिता
Aruna Dogra Sharma
यादें
kausikigupta315
पिता के रिश्ते में फर्क होता है।
Taj Mohammad
पहाड़ों की रानी शिमला
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
असफ़लताओं के गाँव में, कोशिशों का कारवां सफ़ल होता है।
Manisha Manjari
पापा जी
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
'याद पापा आ गये मन ढाॅंपते से'
Rashmi Sanjay
पहनते है चरण पादुकाएं ।
Buddha Prakash
तुमसे कोई शिकायत नही
Ram Krishan Rastogi
आओ तुम
sangeeta beniwal
कोई मंझधार में पड़ा हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
टोकरी में छोकरी / (समकालीन गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
श्रम पिता का समाया
शेख़ जाफ़र खान
पिता
लक्ष्मी सिंह
मर गये ज़िंदगी को
Dr fauzia Naseem shad
पिता, पिता बने आकाश
indu parashar
आया रक्षाबंधन का त्योहार
Anamika Singh
इश्क कोई बुरी बात नहीं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिता
Keshi Gupta
यही तो इश्क है पगले
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
क्या लगा आपको आप छोड़कर जाओगे,
Vaishnavi Gupta
Loading...