Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Jul 2023 · 1 min read

*कलम जादू भरी जग में, चमत्कारी कहाती है (मुक्तक)*

कलम जादू भरी जग में, चमत्कारी कहाती है (मुक्तक)

कलम जादू भरी जग में, चमत्कारी कहाती है
दिखाती राह जीवन में, कलम चलना सिखाती है
भले आधी मिले रोटी, अधूरे पेट रह लेना
निरक्षर पर नहीं रहना, कलम सबको बताती है

रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

143 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
2) भीड़
2) भीड़
पूनम झा 'प्रथमा'
नाराज नहीं हूँ मैं   बेसाज नहीं हूँ मैं
नाराज नहीं हूँ मैं बेसाज नहीं हूँ मैं
Priya princess panwar
जीवन एक संगीत है | इसे जीने की धुन जितनी मधुर होगी , जिन्दगी
जीवन एक संगीत है | इसे जीने की धुन जितनी मधुर होगी , जिन्दगी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
अगर आप में व्यर्थ का अहंकार है परन्तु इंसानियत नहीं है; तो म
अगर आप में व्यर्थ का अहंकार है परन्तु इंसानियत नहीं है; तो म
विमला महरिया मौज
'मौन अभिव्यक्ति'
'मौन अभिव्यक्ति'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
*रिश्ता होने से रिश्ता नहीं बनता,*
*रिश्ता होने से रिश्ता नहीं बनता,*
शेखर सिंह
फिर से जीने की एक उम्मीद जगी है
फिर से जीने की एक उम्मीद जगी है "कश्यप"।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
वर्तमान सरकारों ने पुरातन ,
वर्तमान सरकारों ने पुरातन ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
डर डर के उड़ रहे पंछी
डर डर के उड़ रहे पंछी
डॉ. शिव लहरी
भ्रम नेता का
भ्रम नेता का
Sanjay ' शून्य'
प्यार क्या है
प्यार क्या है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
*🌹जिसने दी है जिंदगी उसका*
*🌹जिसने दी है जिंदगी उसका*
Manoj Kushwaha PS
अपनी-अपनी दिवाली
अपनी-अपनी दिवाली
Dr. Pradeep Kumar Sharma
काम ये करिए नित्य,
काम ये करिए नित्य,
Shweta Soni
हम रहें आजाद
हम रहें आजाद
surenderpal vaidya
*दादी ने गोदी में पाली (बाल कविता)*
*दादी ने गोदी में पाली (बाल कविता)*
Ravi Prakash
सृजन तेरी कवितायें
सृजन तेरी कवितायें
Satish Srijan
कविता
कविता
Shyam Pandey
मैं रात भर मैं बीमार थीऔर वो रातभर जागती रही
मैं रात भर मैं बीमार थीऔर वो रातभर जागती रही
Dr Manju Saini
माँ का अबोला / मुसाफ़िर बैठा
माँ का अबोला / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
"मेरे हमसफर"
Ekta chitrangini
3298.*पूर्णिका*
3298.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आज तुम्हारे होंठों का स्वाद फिर याद आया ज़िंदगी को थोड़ा रोक क
आज तुम्हारे होंठों का स्वाद फिर याद आया ज़िंदगी को थोड़ा रोक क
पूर्वार्थ
💐प्रेम कौतुक-481💐
💐प्रेम कौतुक-481💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
रेतीले तपते गर्म रास्ते
रेतीले तपते गर्म रास्ते
Atul "Krishn"
संवेदनाओं का भव्य संसार
संवेदनाओं का भव्य संसार
Ritu Asooja
अपनों की भीड़ में भी
अपनों की भीड़ में भी
Dr fauzia Naseem shad
*रिश्ते*
*रिश्ते*
Dushyant Kumar
#लघु_व्यंग्य
#लघु_व्यंग्य
*Author प्रणय प्रभात*
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Loading...