Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
2 Aug 2023 · 1 min read

कर्म-धर्म

कर्म में आसक्त होकर,
कर्म की तू राह चल..
चाहे जो हो जाए प्यारे,
धर्म से तू ना बदल..
धर्म छोड़ा तो कर्म ना,
काम तेरे आएगा..
समय छूटेगा हाथ से और,
पीछे तू पच्छताएगा।।

Language: Hindi
2 Likes · 385 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
अधरों ने की  दिल्लगी, अधरों  से  कल  रात ।
अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।
sushil sarna
*सुबह हुई तो गए काम पर, जब लौटे तो रात थी (गीत)*
*सुबह हुई तो गए काम पर, जब लौटे तो रात थी (गीत)*
Ravi Prakash
Sometimes…
Sometimes…
पूर्वार्थ
मेरी फितरत में नहीं है हर किसी का हो जाना
मेरी फितरत में नहीं है हर किसी का हो जाना
Vishal babu (vishu)
गणेश चतुर्थी के शुभ पावन अवसर पर सभी को हार्दिक मंगल कामनाओं के साथ...
गणेश चतुर्थी के शुभ पावन अवसर पर सभी को हार्दिक मंगल कामनाओं के साथ...
डॉ.सीमा अग्रवाल
पहले की भारतीय सेना
पहले की भारतीय सेना
Satish Srijan
मोर
मोर
Manu Vashistha
"टिकमार्क"
Dr. Kishan tandon kranti
अवधी लोकगीत
अवधी लोकगीत
प्रीतम श्रावस्तवी
सीपी में रेत के भावुक कणों ने प्रवेश किया
सीपी में रेत के भावुक कणों ने प्रवेश किया
ruby kumari
#गीत /
#गीत /
*Author प्रणय प्रभात*
शेरू
शेरू
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सुन्दर तन तब जानिये,
सुन्दर तन तब जानिये,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
***
*** " ओ मीत मेरे.....!!! " ***
VEDANTA PATEL
दोस्ती का तराना
दोस्ती का तराना
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
मैंने इन आंखों से ज़माने को संभालते देखा है
मैंने इन आंखों से ज़माने को संभालते देखा है
Phool gufran
19, स्वतंत्रता दिवस
19, स्वतंत्रता दिवस
Dr Shweta sood
गुरु असीम ज्ञानों का दाता 🌷🙏
गुरु असीम ज्ञानों का दाता 🌷🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
3223.*पूर्णिका*
3223.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
वर्तमान
वर्तमान
Shyam Sundar Subramanian
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
तुम यूं मिलो की फासला ना रहे दरमियां
तुम यूं मिलो की फासला ना रहे दरमियां
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
!! चमन का सिपाही !!
!! चमन का सिपाही !!
Chunnu Lal Gupta
जय शिव-शंकर
जय शिव-शंकर
Anil Mishra Prahari
मासुमियत - बेटी हूँ मैं।
मासुमियत - बेटी हूँ मैं।
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
हारो बेशक कई बार,हार के आगे झुको नहीं।
हारो बेशक कई बार,हार के आगे झुको नहीं।
Neelam Sharma
मझधार
मझधार
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
बंदरा (बुंदेली बाल कविता)
बंदरा (बुंदेली बाल कविता)
Dr. Reetesh Kumar Khare डॉ रीतेश कुमार खरे
आज बहुत याद करता हूँ ।
आज बहुत याद करता हूँ ।
Nishant prakhar
श्रेष्ठता
श्रेष्ठता
Paras Nath Jha
Loading...