Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Apr 2024 · 1 min read

और क्या ज़िंदगी का हासिल है

और क्या ज़िंदगी का हासिल है
जो है साबित वही तो क़ाबिल है

38 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Shweta Soni
View all
You may also like:
जब घर से दूर गया था,
जब घर से दूर गया था,
भवेश
मैं तो निकला था,
मैं तो निकला था,
Dr. Man Mohan Krishna
संस्कार और अहंकार में बस इतना फर्क है कि एक झुक जाता है दूसर
संस्कार और अहंकार में बस इतना फर्क है कि एक झुक जाता है दूसर
Rj Anand Prajapati
निज धर्म सदा चलते रहना
निज धर्म सदा चलते रहना
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
निकट है आगमन बेला
निकट है आगमन बेला
डॉ.सीमा अग्रवाल
पुस्तक तो पुस्तक रहा, पाठक हुए महान।
पुस्तक तो पुस्तक रहा, पाठक हुए महान।
Manoj Mahato
बैठ गए
बैठ गए
विजय कुमार नामदेव
मैं
मैं "लूनी" नही जो "रवि" का ताप न सह पाऊं
ruby kumari
एक समझदार व्यक्ति द्वारा रिश्तों के निर्वहन में अचानक शिथिल
एक समझदार व्यक्ति द्वारा रिश्तों के निर्वहन में अचानक शिथिल
Paras Nath Jha
इतना तो आना चाहिए
इतना तो आना चाहिए
Anil Mishra Prahari
होठों पे वही ख़्वाहिशें आँखों में हसीन अफ़साने हैं,
होठों पे वही ख़्वाहिशें आँखों में हसीन अफ़साने हैं,
शेखर सिंह
तुम्हारा एक दिन..…........एक सोच
तुम्हारा एक दिन..…........एक सोच
Neeraj Agarwal
जिसे पश्चिम बंगाल में
जिसे पश्चिम बंगाल में
*Author प्रणय प्रभात*
भूख सोने नहीं देती
भूख सोने नहीं देती
Shweta Soni
Life through the window during lockdown
Life through the window during lockdown
ASHISH KUMAR SINGH
जो तेरे दिल पर लिखा है एक पल में बता सकती हूं ।
जो तेरे दिल पर लिखा है एक पल में बता सकती हूं ।
Phool gufran
बेहद दौलत भरी पड़ी है।
बेहद दौलत भरी पड़ी है।
सत्य कुमार प्रेमी
बच्चे
बच्चे
Dr. Pradeep Kumar Sharma
यारों की आवारगी
यारों की आवारगी
The_dk_poetry
रिश्ते
रिश्ते
Dr fauzia Naseem shad
प्रेम एक सहज भाव है जो हर मनुष्य में कम या अधिक मात्रा में स
प्रेम एक सहज भाव है जो हर मनुष्य में कम या अधिक मात्रा में स
Dr MusafiR BaithA
'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में रमेशराज के व्यवस्था-विरोध के गीत
'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में रमेशराज के व्यवस्था-विरोध के गीत
कवि रमेशराज
अब तो उठ जाओ, जगाने वाले आए हैं।
अब तो उठ जाओ, जगाने वाले आए हैं।
नेताम आर सी
खूबसूरत लम्हें जियो तो सही
खूबसूरत लम्हें जियो तो सही
Harminder Kaur
घाव मरहम से छिपाए जाते है,
घाव मरहम से छिपाए जाते है,
Vindhya Prakash Mishra
छोड दो उनको उन के हाल पे.......अब
छोड दो उनको उन के हाल पे.......अब
shabina. Naaz
प्यार को शब्दों में ऊबारकर
प्यार को शब्दों में ऊबारकर
Rekha khichi
नारी वेदना के स्वर
नारी वेदना के स्वर
Shyam Sundar Subramanian
*भारत जिंदाबाद (गीत)*
*भारत जिंदाबाद (गीत)*
Ravi Prakash
प्यार या प्रतिशोध में
प्यार या प्रतिशोध में
Keshav kishor Kumar
Loading...