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1 Feb 2017 · 1 min read

ऐ ज़िन्दगी तू कड़वी थी हम फ़िर भी पी गए

कुछ ज़ख़्म वक़्त ने भरे कुछ यूंही सी गए
ऐ ज़िन्दगी तू कड़वी थी हम फ़िर भी पी गए

जिनको समझते आये ये रिश्ते हैं ख़ून के
वो रिश्ते मेरे जिस्म का ही ख़ून पी गए

जलने के बाद घर वो उजालों से हैं ख़फ़ा
क्यों लेके उनके शहर मे तुम रौशनी गए

हमको सिला ये ख़ुदकुशी करने का है मिला
दुनिया से हाथ धो लिए जन्नत से भी गए
,
जो तीस मार खान थे वो भी मरे (क़मर)
कब लेके अपने साथ मे वो ज़िन्दगी गए
,
आमिर क़मर सन्दीलवी

1 Like · 371 Views
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