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23 Apr 2023 · 1 min read

एक सख्सियत है दिल में जो वर्षों से बसी है

एक सख्सियत है दिल में जो वर्षों से बसी है
हैं जिस्म तो आज़ाद मगर रूह फंसी है
उसके जमाल में हृदय बस इतना जानता
मैं रोया तो रोयी, मेरे हंसने पे हंसी है

✍️ हरवंश हृदय

3 Likes · 425 Views
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