Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jan 2024 · 1 min read

एक पीर उठी थी मन में, फिर भी मैं चीख ना पाया ।

एक पीर उठी थी मन में, फिर भी मैं चीख ना पाया ।
सब पीट रहे थे जिसको, अब तक वो लीख ना पाया ।।

मॉं, तेरी शिक्षा ने, मुझको बना दिया “आचार्य” ।
पर देखो विधि का लेखा, मैं तुझको सीख ना पाया ।।

✍️ आचार्य वृन्दान्त ✍️

89 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
और भी शौक है लेकिन, इश्क तुम नहीं करो
और भी शौक है लेकिन, इश्क तुम नहीं करो
gurudeenverma198
"फागुन गीत..2023"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
मजदूर हैं हम मजबूर नहीं
मजदूर हैं हम मजबूर नहीं
नेताम आर सी
मेरे शब्द, मेरी कविता, मेरे गजल, मेरी ज़िन्दगी का अभिमान हो तुम।
मेरे शब्द, मेरी कविता, मेरे गजल, मेरी ज़िन्दगी का अभिमान हो तुम।
Anand Kumar
केतकी का अंश
केतकी का अंश
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
आटा
आटा
संजय कुमार संजू
सम्मान से सम्मान
सम्मान से सम्मान
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Dr. Arun Kumar Shastri
Dr. Arun Kumar Shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
प्रेम
प्रेम
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
सांच कह्यां सुख होयस्यी,सांच समद को सीप।
सांच कह्यां सुख होयस्यी,सांच समद को सीप।
विमला महरिया मौज
*हजारों हादसों से रोज, जो हमको बचाता है (हिंदी गजल)*
*हजारों हादसों से रोज, जो हमको बचाता है (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
पाश्चात्यता की होड़
पाश्चात्यता की होड़
Mukesh Kumar Sonkar
"बेहतर है चुप रहें"
Dr. Kishan tandon kranti
नेमत, इबादत, मोहब्बत बेशुमार दे चुके हैं
नेमत, इबादत, मोहब्बत बेशुमार दे चुके हैं
हरवंश हृदय
आंबेडकर न होते तो...
आंबेडकर न होते तो...
Shekhar Chandra Mitra
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
दिखता नही किसी को
दिखता नही किसी को
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
लाचार जन की हाय
लाचार जन की हाय
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
विडम्बना और समझना
विडम्बना और समझना
Seema gupta,Alwar
(16) आज़ादी पर
(16) आज़ादी पर
Kishore Nigam
इंसान और कुता
इंसान और कुता
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
वक़्त आने पर, बेमुरव्वत निकले,
वक़्त आने पर, बेमुरव्वत निकले,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
हम आगे ही देखते हैं
हम आगे ही देखते हैं
Santosh Shrivastava
*सूनी माँग* पार्ट-1
*सूनी माँग* पार्ट-1
Radhakishan R. Mundhra
मिली जिस काल आजादी, हुआ दिल चाक भारत का।
मिली जिस काल आजादी, हुआ दिल चाक भारत का।
डॉ.सीमा अग्रवाल
गजल
गजल
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
एक सही आदमी ही अपनी
एक सही आदमी ही अपनी
Ranjeet kumar patre
अरे ! पिछे मुडकर मत देख
अरे ! पिछे मुडकर मत देख
VINOD CHAUHAN
अतिथि देवो न भव
अतिथि देवो न भव
Satish Srijan
Growth requires vulnerability.
Growth requires vulnerability.
पूर्वार्थ
Loading...